
* पुराने औद्योगिक उपकरणों की उम्र बढ़ाने में आरएलए अहम, 60-70 फीसदी संरचनाएं डिजाइन लाइफ से आगे चल रही: डॉ. संदीप घोष चौधरी
उदित वाणी, जमशेदपुर : सीएसआईआर-नेशनल मेटलर्जिकल लेबोरेटरी (सीएसआईआर-एनएमएल) में गुरुवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “रिमेनिंग लाइफ असेसमेंट ऑफ इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स (आरएलए-2026)” का शुभारंभ हो गया. देशभर से लगभग 150 वैज्ञानिक, उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और नीति-निर्माता इस संगोष्ठी में शामिल हुए. आरएलए-2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. जी. सतीश रेड्डी (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य, पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार रक्षा मंत्री और पूर्व डीआरडीओ चेयरमैन) उपस्थित रहे. कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने की. संगोष्ठी के चेयरमैन डॉ. जितेंद्र कुमार साहू और कन्वीनर डॉ. सुमंत बागुई ने भी उद्घाटन में भाग लिया. सभी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया.

आरएलए की भूमिका पर जोर
मुख्य अतिथि डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने अपने उद्घाटन भाषण में आरएलए को भारत की औद्योगिक अवसंरचना के लिए रणनीतिक अनुशासन बताया. उन्होंने कहा कि बॉयलर, टरबाइन, प्रेशर वेसल और पाइपिंग सिस्टम जैसी महत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा, विश्वसनीयता और निरंतर संचालन के लिए आरएलए अनिवार्य है. डॉ. रेड्डी ने रक्षा क्षेत्र में मिसाइलों, फाइटर जेट्स और विभिन्न विमानों के संरचनात्मक जीवन को बढ़ाने में आरएलए की भूमिका पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को आरएलए प्रक्रियाओं में शामिल करने से सेवा जीवन का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकता है. उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले सेवा डेटा के संग्रह पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक इंजीनियरिंग सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की भी आरएलए करना जरूरी है.
आरएलए से बूढ़ी संरचनाओं का उम्र बढ़ाया जा सकता है
एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने स्वागत भाषण में कहा कि देश के पेट्रोकेमिकल, थर्मल पावर और खनन क्षेत्रों में 60 से 70 प्रतिशत औद्योगिक संरचनात्मक घटक अपनी मूल डिजाइन लाइफ से आगे चल रहे हैं. उन्होंने कहा कि रिमेनिंग लाइफ असेसमेंट (आरएलए) इन बूढ़ी संरचनाओं की उम्र बढ़ाने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और बिना किसी बड़ी दुर्घटना के निरंतर उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आरएलए-2026 के चेयरमैन डॉ. जेके साहू ने संगोष्ठी के उद्देश्यों पर संक्षिप्त प्रस्तुति दी. उन्होंने बताया कि सीएसआईआर-एनएमएल थर्मल पावर, एयरोस्पेस और ऑयल-गैस क्षेत्रों में आरएलए के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है.
संगोष्ठी के दो दिनों में चार मुख्य तकनीक सत्र होंगे
1. क्रीप और स्ट्रेस रप्चर आधारित जीवन आकलन
2. माइक्रोस्ट्रक्चर आधारित और डेटा ड्रिवन मॉडल्स फॉर आरएलए
3. सेंसर्स और एडवांस्ड एनडीटी टूल्स
4. आरएलए पद्धतियों में हालिया प्रगति
इस संगोष्ठी में एमआरपीएल, ओएनजीसी, टाटा स्टील, इंस्ट्रॉन, ट्यूबेक्स, जायसवाल नेको, आईआईटी खड़गपुर, एनटीपीसी-नेत्रा, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, महिंद्रा डिफेंस आदि संगठनों के विशेषज्ञ शामिल हैं. कन्वीनर डॉ. सुमंत बागुई ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि ऐसी पहलें भारत की पुरानी औद्योगिक संपत्तियों को सुरक्षित रूप से जीवन विस्तार देने की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण हैं, जिससे औद्योगिक दक्षता और राष्ट्रीय सुरक्षा को बल मिलेगा.

