उदित वाणी, जमशेदपुर : कई युवा सपने देखते हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम दिल की आवाज़ सुनकर उस पर चल पड़ते हैं. हेमंत गुप्ता (Hemant Gupta) उन चुनिंदा लोगों में से एक हैं, जिन्होंने IIT (आईआईटी) की चमकदार डिग्री को छोड़कर Mountaineering (पर्वतारोहण) जैसे “ऑफ-बीट” रास्ते को चुना और न सिर्फ खुद को साबित किया, बल्कि हजारों युवाओं की जिंदगी को नई दिशा दी.
सपनों से शुरू हुई कहानी
2011 में हेमंत गुप्ता Tata Steel (टाटा स्टील) में Graduate Engineer Trainee (GET) के रूप में ज्वाइन हुए. उनकी पढ़ाई आईआईटी से हुई थी, जहां टेक्निकल स्किल्स सीखी जाती हैं, लेकिन कॉलेज के दिनों में थोड़े-बहुत एक्सपीडिशन का अनुभव उन्हें पर्वतों की ओर खींच रहा था.
टाटा स्टील में आने के बाद 2015 में उन्होंने Bachendri Pal (बछेन्द्री पाल) मैडम के नेतृत्व में Mount Everest (माउंट एवरेस्ट) की चढ़ाई की कोशिश की. नेपाल में आए भयानक भूकंप ने सब कुछ बदल दिया. मौत से बाल-बाल बचे, लेकिन हिम्मत नहीं हारी. दो साल बाद 2017 में हेमंत गुप्ता ने माउंट एवरेस्ट को फतह कर लिया. यह सिर्फ एक चोटी नहीं थी—यह उनके अंदर के जज्बे की जीत थी.
पहली रेजिडेंशियल स्पोर्ट क्लाइंबिंग एकेडेमी की स्थापना की
टाटा स्टील में काम करते हुए उन्होंने अपना पर्वतारोहण का शौक बछेन्द्री पाल मैडम और तत्कालीन वीपीसीएस सुनील भास्करन के साथ शेयर किया. दोनों ने उन्हें प्रोत्साहित किया और हेमंत को Tata Steel Adventure Foundation (TSAF) भेज दिया.
2019 में देश की पहली महिला एवरेस्ट विजेता बछेन्द्री पाल के रिटायरमेंट के बाद हेमंत गुप्ता TAF के प्रमुख बन गए. यहां उन्होंने सिर्फ नेतृत्व नहीं संभाला, बल्कि एक नई विरासत रची. उनके नेतृत्व में TSAF ने अभूतपूर्व प्रगति की. भारत की पहली Residential Sport Climbing Academy (रेजिडेंशियल स्पोर्ट क्लाइंबिंग एकेडेमी) की स्थापना की. युवाओं और प्रोफेशनल्स में “एडवेंचर की भावना” को हजारों तक पहुंचाया. कई अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स आयोजित किए और TSAF के कैडेट्स ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते. Outdoor Leadership (आउटडोर लीडरशिप) को एक प्रीमियर इंस्टीट्यूट का दर्जा दिलाया.
आराम छोड़कर नई चुनौती
TSAF में सफलता के चरम पर पहुंचने के बाद भी हेमंत गुप्ता ने महसूस किया कि वे कॉम्फर्ट जोन में आ गए हैं. उन्होंने हमेशा चुनौतियां पसंद कीं. इसलिए 1 अप्रैल 2026 को TSAF को भावपूर्ण विदाई देते हुए उन्होंने नई यात्रा शुरू करने का फैसला लिया. अब वे Bengaluru (बेंगलुरु) में अपना Startup (स्टार्टअप) शुरू कर रहे हैं, जो Climbing, Leadership Training (क्लाइंबिंग, लीडरशिप ट्रेनिंग) और High Performance Achievement (हाई परफॉर्मेंस अचीवमेंट) को मिलाकर चलेगा.
उनका मकसद बहुत साफ है: आज के कॉर्पोरेट जगत में बढ़ते काम के दबाव में भी लोग हाई परफॉर्मेंस कैसे कर सकते हैं, यह सिखाना; डिजिटल दुनिया में व्यक्तिगत विकास के लिए नेचर और एडवेंचर से जुड़ना जरूरी है; स्कूल स्तर से बच्चों में एडवेंचर और प्रकृति से जुड़ने की लालसा जगाना.
हेमंत गुप्ता की कहानी हमें ये सबक सिखाती है:
1. दिल की सुनो: आईआईटीयन हो या कोई भी बैकग्राउंड, अगर आपका दिल किसी चीज को पुकारे, तो उसका पीछा करो.
2. असफलता से डरो मत: 2015 के भूकंप के बाद 2017 में एवरेस्ट फतह करना इसका प्रमाण है.
3. कॉम्फर्ट जोन छोड़ो: 1 अप्रैल 2026 को TSAF छोड़कर स्टार्टअप का साहस दिखाना.
4. दूसरों की जिंदगी बेहतर बनाओ: उन्होंने हजारों युवाओं को क्लाइंबिंग का मौका दिया.
5. जिंदगी एक एडवेंचर है: हेमंत गुप्ता की यह नई यात्रा उन सभी युवाओं के लिए एक संदेश है जो कुछ सार्थक करना चाहते हैं.


