
जमशेदपुर: एटक (AITUC) के झंडे तले टेल्को मजदूर यूनियन का 22वां सम्मेलन गोविंदपुर स्थित कार्यालय में कॉमरेड राम अयोध्या राम की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सम्मेलन में मजदूरों की समस्याओं, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों तथा श्रम नीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए एटक के उप महासचिव कॉम हीरा अरकने ने अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिका की साम्राज्यवादी नीतियों के कारण विश्व तेल और गैस संकट से जूझ रहा है। उन्होंने रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव को समाप्त करने की मांग की। साथ ही देश के भीतर केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा-चिकित्सा खर्च पर चिंता जताई। उन्होंने श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की और इसे “काला दिन” करार दिया।
इसके बाद महासचिव कॉम अंबुज कुमार ठाकुर ने 2021 से 2025 तक का महासचिव प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि देश में ठेका प्रथा के विस्तार से स्थायी रोजगार खत्म हो रहे हैं और मजदूरों का शोषण बढ़ रहा है। उन्होंने समान काम के लिए समान वेतन की मांग उठाई और संगठित विरोध की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रतिवेदन पर कॉम मुद्रिका सिन्हा, कॉम निगमानंद पॉल, कॉम रामजीवन कामत, कॉम विनय सिंह, कॉम श्रवण कुमार और कॉम शिवजी सिंह ने चर्चा की, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।
कॉम रामजीवन कामत ने चार वर्षों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया, जिसे भी सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। सम्मेलन का संचालन कॉम श्रवण कुमार ने किया। एआईएसएफ के राज्य सचिव कॉम विक्रम कुमार एवं कॉम जयशंकर प्रसाद ने भी सभा को संबोधित किया। सम्मेलन में 50 से 60 मजदूर उपस्थित रहे।
नई कार्यकारिणी का गठन
सम्मेलन के दौरान 15 सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन किया गया। सर्वसम्मति से कॉम ओम प्रकाश सिंह को अध्यक्ष, अंबुज कुमार ठाकुर, हीरा अरकने और श्रवण कुमार को उपाध्यक्ष, कॉम रामजीवन कामत को महासचिव, सोनू कुमार को सचिव और जयशंकर प्रसाद को कोषाध्यक्ष चुना गया।
मजदूर हितों को लेकर कई प्रस्ताव पारित
सम्मेलन में टाटा मोटर्स में ठेका मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी, पीएफ और ईएसआई लागू करने, त्योहारों में काम का उचित भुगतान सुनिश्चित करने, स्थायी मजदूरों की समस्याओं के समाधान, कनवाई चालकों के आंदोलन को समर्थन, ठेका मजदूरों के लिए 26 हजार न्यूनतम वेतन लागू कराने तथा लंच आवर में बाहर निकलने पर लगी रोक हटाने जैसे मुद्दों पर संघर्ष का निर्णय लिया गया।
सम्मेलन का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि आने वाले दिनों में टाटा मोटर्स में मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए जोरदार आंदोलन किया जाएगा।

