
उदित वाणी, जमशेदपुर : बारीडीह मार्केट स्थित दुर्गा पूजा मैदान में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन में भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. यह कार्यक्रम देशभर में आयोजित शताब्दी वर्ष की श्रृंखला का हिस्सा था और इसका उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित, जागरूक और सशक्त बनाना रहा.
मंच पर गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत से हुई. मंच पर संघ के विभाग प्रचारक सत्य प्रकाश जी, महापौर, उपमहापौर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे. वक्ताओं ने समाज को एकजुट रहने और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने का संदेश दिया.
वीर सावरकर के विचारों से प्रेरणा
अध्यक्षों और अन्य वक्ताओं ने स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को याद करते हुए उनके विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि हिंदू जब तक हिंदू है, तब तक वह भारत की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने को तत्पर रहता है. समाज से अपील की गई कि मातृभूमि को सर्वोपरि मानते हुए राष्ट्रहित में कार्य करें.
सत्य प्रकाश जी का संदेश
संघ प्रचारक सत्य प्रकाश जी ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब हिंदू समाज बिखरा है, तब-तब उसे कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है. उन्होंने विदेशी आक्रमणों और आंतरिक मतभेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में समाज को एकजुट और जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है.
आयोजक का संदेश और प्रतिकूल मौसम में उत्साह
आयोजक अखिलेश चौधरी ने कहा कि यह सम्मेलन समाज में नई चेतना और ऊर्जा का संचार करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है. उन्होंने टिप्पणी की कि “भगवान इंद्रदेव का भी रूप आज कुछ अलग ही देखने को मिला,” क्योंकि भारी बारिश और तूफान के बावजूद लोग कार्यक्रम में डटे रहे. पूरे स्थल पर “भारत माता की जय” के नारे गूंजते रहे.
संस्कृति, परंपरा और राष्ट्र के प्रति जागरूकता
वक्ताओं ने कहा कि हिंदू समाज केवल एक धार्मिक समुदाय नहीं, बल्कि एक समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है, जो पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में बांधती है. युवाओं से अपील की गई कि वे अपनी संस्कृति, परंपरा और राष्ट्र के प्रति जागरूक रहें और समाज के उत्थान में सक्रिय भूमिका निभाएं.
सम्मेलन का समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने हिंदू समाज की एकता, अखंडता और राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया. सम्मेलन का समापन “भारत माता की जय” के नारों के साथ हुआ. प्रतिकूल मौसम और भारी बारिश के बावजूद लोगों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि समाज में जागरूकता और संगठन की भावना लगातार मजबूत हो रही है.

