
उदित वाणी, जमशेदपुर : झारखंड के औद्योगिक और साक्षर जिलों में शुमार पूर्वी सिंहभूम (East Singhbhum) के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से जनसंख्या असंतुलन की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है. आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि जिले के दो प्रमुख ब्लॉकों – पटमदा (864) और घाटशिला (867) में लिंगानुपात राज्य और राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है.

लिंगानुपात का अर्थ प्रति 1,000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या से है. विभिन्न स्तरों पर तुलना करने पर स्थिति इस प्रकार सामने आती है:
क्षेत्र/इकाई लिंगानुपात
भारत (जनगणना 2011): ~943
भारत (NFHS-5, 2019–21): 1,020
झारखंड राज्य औसत: ~948
पूर्वी सिंहभूम जिला औसत: ~949
घाटशिला ब्लॉक: 867
पटमदा ब्लॉक: 864
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार देश में पहली बार लिंगानुपात 1,020 तक पहुंचा है, जो एक सकारात्मक संकेत है. हालांकि 2011 की जनगणना में यह 943 था. खास बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों (1,037) में शहरी क्षेत्रों (985) की तुलना में बेहतर लिंगानुपात दर्ज किया गया है.
उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में शनिवार 28 मार्च को स्वास्थ्य विभाग की समीक्षात्मक बैठक में जिले में संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं और सेवाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई.
इस दौरान उपायुक्त ने पटमदा और घाटशिला में कम लिंगानुपात पर चिंता जताते हुए उपायुक्त ने अवैध नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड सेंटर और झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
उन्होंने एसडीओ के माध्यम से जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा.
बैठक में सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल, डॉ. जोगेश्वर प्रसाद, डॉ. रंजीत पांडा, डॉ. ए. मित्रा, डॉ. मृत्युंजय धावड़िया, डॉ. ओ.पी. केशरी समेत सभी एमओआईसी, एसीएमओ तथा स्वास्थ्य विभाग के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे.

