
उदित वाणी, रांची; झारखंड में आईसीयू सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बीएनआर चाणक्या में ‘गाइडलाइन्स फॉर ऑर्गेनाइजेशन एंड डिलीवरी ऑफ इंटेंसिव केयर सर्विसेज’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया।
हब एंड स्पोक मॉडल से मजबूत होगी स्वास्थ्य व्यवस्था
सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ के आधार पर विकसित किया जाएगा। इसके तहत रिम्स और सदर अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य के चार प्रमुख अस्पतालों को पहले ही रिम्स से टेली-आईसीयू के माध्यम से जोड़ा जा चुका है और आगे निजी अस्पतालों को भी इस नेटवर्क में शामिल किया जाएगा, ताकि दूर-दराज के मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श मिल सके।

आईसीयू बेड की कमी दूर करने के लिए बनेगा रोडमैप
राज्य में वर्तमान स्वास्थ्य ढांचे की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि झारखंड में कुल 28,000 बेड उपलब्ध हैं, जिनमें सरकारी और निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बराबर है। मानकों के अनुसार कुल बेड का 15 प्रतिशत यानी लगभग 4,200 आईसीयू बेड होने चाहिए, जबकि अभी 1,000 से भी कम उपलब्ध हैं। इस अंतर को पाटने के लिए 3 से 4 वर्षों का रोडमैप तैयार किया गया है। साथ ही राज्य में कुल बेड की संख्या बढ़ाकर 60,000 करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि 18 जिलों में आईसीयू बेड की भारी कमी है, जिसे दूर करने के लिए तकनीकी कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मशीन और संसाधनों की नहीं होगी कमी
अजय कुमार सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए मशीन और उपकरणों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार समय पर फंड उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सिविल सर्जन और मेडिकल कॉलेजों के बेहतर समन्वय से स्वास्थ्य सेवाओं का संतुलित भौगोलिक वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।
सरकारी-निजी भागीदारी पर जोर
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करना होगा। ‘अबुआ स्वास्थ्य’ और ‘आयुष्मान भारत’ जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए अंतिम व्यक्ति तक इलाज पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही राज्य स्तर पर प्रशिक्षण केंद्र विकसित करने की भी योजना है, जिससे निजी अस्पतालों में भी आईसीयू प्रबंधन को मजबूत किया जा सके।
अनावश्यक रेफरल पर रोक लगाने की अपील
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि मरीजों को अनावश्यक रूप से रेफर करने से बचना चाहिए। यदि रेफर करना आवश्यक हो तो पहले यह सुनिश्चित कर लें कि जिस अस्पताल में भेजा जा रहा है, वहां मरीज के अनुरूप बेड और सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर हब एंड स्पोक मॉडल विकसित होने से रिम्स और रांची सदर अस्पताल पर दबाव कम होगा।
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण
कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने बताया कि एसओपी के तहत सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में आईसीयू और सीसीयू में इलाज सुनिश्चित किया जाएगा। निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं डॉ सिद्धार्थ सान्याल ने भी अपने विचार रखे। तकनीकी सत्र में रिम्स ट्रॉमा सेंटर के एचओडी डॉ प्रदीप भट्टाचार्य ने प्रशिक्षण दिया। इस अवसर पर डॉ अनिल, डॉ कमलेश, डॉ प्रदीप, डॉ राहुल किशोर सिंह, डॉ मुकेश मिश्रा सहित मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य, सिविल सर्जन और निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

