
जमशेदपुर : विश्व कविता दिवस के अवसर पर शहर की प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘बाचिक मंजरी’ द्वारा शनिवार को रवीन्द्र भवन प्रेक्षागृह में तृतीय वार्षिकोत्सव के तहत “युद्ध नहीं, मानवता की जीत” विषय पर आधारित एक भावनात्मक कविता पाठ एवं नृत्य-सांस्कृतिक संध्या का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कृत श्लोक पाठ से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद मुख्य अतिथि झारखंड बंगभाषी समन्वय समिति के अध्यक्ष विकास मुखर्जी, विशिष्ट अतिथि तपस मित्र, शिक्षक सब्यसाची चंद, घाटशिला गौरी कुंज के महासचिव तापस चटर्जी तथा संस्था के अध्यक्ष अरविंद मित्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। इनमें रवीन्द्र भवन के महासचिव आशीष चौधरी, ताज के अध्यक्ष तुषार दासगुप्ता, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रशंसक पीके नंदी, निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन की अध्यक्ष झरना कर, घाटशिला के डॉ. संदीप चंद्रा, टैगोर स्कूल ऑफ आर्ट्स के अध्यक्ष सुजीत मुखर्जी एवं चंदना चौधरी प्रमुख रूप से शामिल रहे। कार्यक्रम को दो चरणों में विभाजित किया गया। पहले चरण में युद्ध-विरोधी कविताओं के माध्यम से शांति और मानवता का संदेश दिया गया, जबकि दूसरे चरण में प्रेम और प्रकृति पर आधारित रचनात्मक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। विशेष रूप से बाल कलाकारों की प्रस्तुतियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
करीब 40 कलाकारों की सहभागिता और सुव्यवस्थित आयोजन ने इस सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन सुष्मिता गांगुली एवं मलय आचार्य ने किया, जबकि मिथु मंडल ने सहयोगी भूमिका निभाई। आयोजन की योजना, समन्वय और निर्देशन में सुष्मिता गांगुली का योगदान विशेष रूप से सराहनीय रहा। अंत में पूरबी घोष ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। मंच की आकर्षक सजावट मलय आचार्य और मौसमी घोष हाजरा द्वारा की गई, जिसने पूरे कार्यक्रम की सौंदर्यता को और भी निखार दिया।
यह सांस्कृतिक संध्या अपने मूल संदेश “युद्ध नहीं, मानवता की जीत” को सशक्त रूप से प्रस्तुत करते हुए शांति, प्रेम और सह-अस्तित्व का प्रेरक संदेश देने में पूरी तरह सफल रही।

