उदित वाणी, जमशेदपुर : विलुप्त होती आदिवासी पारंपरिक खेलों को पुनर्जीवित करने की दिशा में टाटा स्टील फाउंडेशन की पहल रंग लाती दिख रही है. दो दिवसीय प्रीमियर लीग-2026 के अंतिम दिन शुक्रवार को तेंतला फुटबॉल मैदान में पारंपरिक ‘काती’ खेल प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें झारखंड और ओडिशा की सीनियर एवं जूनियर वर्ग की कुल 45 टीमों ने भाग लेकर परंपरा को जीवंत कर दिया.

पारंपरिक खेल को मिला नया मंच
भूमिज एवं संथाल समुदायों के प्रमुख पारंपरिक खेल ‘काती’ को इस आयोजन के माध्यम से नया मंच मिला. यह खेल फसल कटाई के बाद पारंपरिक रूप से खेला जाता है. इसमें एक टीम बांस की लाठी और इमली की लकड़ी से बनी अर्धवृत्ताकार डिस्क ‘काती’ को सीधा खड़ा करती है, जबकि दूसरी टीम निश्चित दूरी से उसे गिराने का प्रयास करती है. प्रत्येक सफल प्रहार पर अंक मिलते हैं और अंत में ‘बर्गा’ (राजा) को गिराकर विजेता का निर्धारण किया जाता है.
विधायक संजीव सरदार ने बढ़ाया हौसला
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पोटका विधायक संजीव सरदार उपस्थित रहे. उन्होंने विजेताओं को पुरस्कृत करते हुए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ऐसे पारंपरिक खेल हमारी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिन्हें संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक खेलों के साथ-साथ अपनी परंपराओं से जुड़े खेलों को भी अपनाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक यह विरासत सुरक्षित रह सके.
प्रतियोगिता के विजेता
सीनियर वर्ग में गुरता (बी) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि एसएसएमसी कोपे द्वितीय, बालीबेड़ा तृतीय एवं खेरबाड़वीर चतुर्थ स्थान पर रहे. वहीं जूनियर वर्ग में हांसदा स्टार मेजोगोड़ा प्रथम, जेजेयुसी रादुड़ द्वितीय, जियाड़ जामाता तृतीय तथा आरएमएमसी पोड़ाहातु चतुर्थ स्थान पर रहे.
आयोजन में इनका रहा योगदान
इस सफल आयोजन में टाटा स्टील फाउंडेशन के ट्राइबल आइडेंटिटी लीड शिव शंकर कांडेयोंग, मैनेजर आनंद बोयपाई, बीरेन तियु, आरसी टुडू, लखन हांसदा, रीतेश टुडू, देवराज मुंडा, शिव नारायण हेंब्रोम, अजिंक्या बिरुआ, सालखन मुर्मू, रमेश सुंडी सहित कई लोगों का सराहनीय योगदान रहा.


