
उदित वाणी, रांची : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के छठें दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही निरसा के विधायक अरुप चटर्जी ने अल्पसूचित प्रश्न के माध्यम से सातवीं, आठवीं व नौंवी झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित झारखंड नगरपालिका सेवा के 63 अधिकारियों की सेवा अबतक संपुष्ट नहीं किये जाने पर सवाल उठाया. साथ ही उन्होंने बताया कि अधिकारियों की सेवा संपुष्ट नहीं होने से उनका नियमित वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा है.
छह-छह महीने तक वेतन लंबित रहने के साथ ही इन अधिकारियों का अबतक जीपीएफ खाता तक नहीं खोला गया है. इसपर सरकार की ओर उत्तर देते हुए नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि राज्य सरकार के नगर विकास व आवास विभाग द्वारा तीन महीने के अंदर संशोधित झारखंड नगरपालिका नियमावली-2025 गठित कर दिया जायेगा. इसके बाद नगरपालिका सेवा संवर्ग के 63 अधिकारियों की वेतन विसंगति को दूर करते हुए उनकी सेवा संपुष्ट कर दिया जायेगा.
मंत्री द्वारा सदन को यह भी बताया गया कि यद्यपि नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा संशोधित झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग-2024 के आलोक में लोक सेवा आयोग द्वारा अनुशंसित 65 अधिकारियों की नियुक्ति नगर आयुक्त, कार्यपालक पदाधिकारी व बिशेष पदाधिकारी के पद पर की गई है. जिसमें से संप्रति 63 अधिकारी कार्यरत हैं. नियमावली के प्रावधानों के तहत अधिकारियों की सेवा संपुष्टि की कार्रवाई के लिए पत्रांक-475, दिनांक 13 फरवरी 2026 द्वारा उनसे आवश्यक प्रमाण पत्रों की मांग की गई है.
वहीं मामले में विलंब होने को लेकर उन्होंने बताया कि झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग नियमावली-2014 एवं नगरपालिका अधिनियम, 2011 का विधिक बिश्लेषण के उपरांत प्रशासनिक संवर्ग के लिए अलग से झारखंड नगरपालिका सेवा नियमावली-2025 गठन प्रक्रियाधीन है. तीन महीने के अंदर इसके गठन के बाद उनकी सेवा नियमित कर दी जायेगी.
नवसृजित 21 एमवीआई के पदों पर शीघ्र शुरू होगी नियुक्ति प्रक्रिया
सिंदरी के विधायक चंद्रदेव महतो ने मोटरयान निरीक्षक नियुक्ति को लेकर सवाल किया. जिसके जबाब में परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने बताया कि सरकार द्वारा बर्ष 2023 में मोटरयान निरीक्षकों के 46 पदों की नियुक्ति की अधियाचना झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को भेजी गई थी तथा आयोग की अनुशंसा के आलोक में 40 मोटरयान निरीक्षकों की रिक्त पदों पर परीक्ष्यमान के रूप में नियुक्ति कर दी गई है और तीन निरीक्षक पहले से कार्यरत थे. जबकि 6 आउटसोर्स से लाए थे. वर्तमान में परिवहन विभाग द्वारा मोटरयान निरीक्षकों के अतिरिक्त 21 पद सृजित किया गया है. जिसपर नियुक्ति प्रक्रिया जल्द ही शुरू कर दी जाएगी.
मंत्री के पीत पत्र के बावजूद ग्रामीण कार्य विभाग में निविदा नहीं की गई रद्य
सत्तारूढ़ पार्टी झामुमो के वरिष्ठ विधायक हेमलाल मुर्मू ने ग्रामीण कार्य विभाग पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विभागीय मंत्री दीपिका पांडेय सिंह द्वारा पीत पत्र लिखे जाने के बावजूद निविदा रद्य नहीं किया गया. उन्होंने बताया कि सरकार के आदेश के बाद ग्रामीण सड़कों और पुलों का बर्ष 2024-25 में निविदा जारी हुआ था. लेकिन लंबे समय के बाद भी उसका निष्पादन नहीं हुआ. जबकि पीडब्ल्यूडी कोड के मुताबिक निविदा की वैधता 180 दिनों की ही होती है.
वहीं मुर्म के इस सवाल पर झामुमो के ही वरिष्ठ विधायक मथुरा प्रसाद महतो व आजसू पार्टी के विधायक निर्मल महतो ने भी टीका टिप्पणी की और कहा कि कई मामलों में एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है. इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं. लोगों को जबाब देना पड़ता है. इसपर विभागीय मंत्री ने स्वीकार किया कि प्रक्रिया में देरी हुई है. उन्होंने बताया कि वित्तीय बर्ष 2024-25 की सभी लंबित निविदाओं को शीघ्र निष्पादित करने का निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिया गया है. मंत्री ने स्पष्ट किया कि 30 दिनों के भीतर निविदाओं का निष्पादन कर दिया जायेगा. अन्यथा निविदा रद्य कर दिया जायेगा. इसका अनुपालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
ग्रामीण सड़कों व पुलों के लिए तय 10 करोड़ रुपए की सीमा को बढ़ाने पर होगा विचार
वहीं भाजपा विधायक अमित कुमार यादव ने अल्पसूचित प्रश्न के जरिये ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए तय 10 करोड़ रुपए की सीमा को बढ़ाने की मांग की. विधायक ने कहा कि इस सीमा के कारण बड़े और जरूरी पुलों का निर्माण अटक रहा है और लागत बढ़ने के बावजूद विभागीय प्रावधान में बदलाव नहीं होने से विकास कार्य बाधित हो रहे हैं.
इस पर विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतों ने समाधान सुझाते हुए कहा कि यदि ग्रामीण विकास विभाग के पास 10 करोड़ से अधिक लागत वाले पुलों के निर्माण का प्रावधान नहीं है. तो ऐसी योजनाओं को पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित कर दिया जाय. इससे तकनीकी और वित्तीय अड़चनें दूर होंगी और निर्माण कार्य में तेजी आएगी. वहीं विभागीय मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि विधायकों की मांग पर विचार किा जायेगा.
236 आपत्तियों के निष्पादन के बाद अभियंताओं के वरीयता का किया जायेगा निर्धारण
भाजपा के वरिष्ठ विधायक सी पी सिंह ने पथ निर्माण विभाग में वरीयता निर्धारण नहीं होने पर सवाल उठाया. इस पर प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार ने उत्तर देते हुए बताया कि वरीयता निर्धारण में 236 आपत्तियां आई है. सरकार द्वारा मामले में अन्तर्विभागीय समिति गठित किया गया है. समिति और विधि विभाग की समीक्षा के बाद यथाशीघ्र वरीयता का निर्धारण कर दिया जायेगा.

