
उदित वाणी, रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में लगातार हो रहे हाथियों के हमले को लेकर चिंता जताते हुए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों को हाथियों के हमलों से बचाव एवं सुरक्षा के लिए जल्द प्रभावी कदम उठाने के सख्त निर्देश दिए. उन्होंने शनिवार को मामले को लेकर वन विभाग के मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक करते हुए कहा कि जंगली हाथियों के हमलों को हर हाल में रोकें और लोगों के जान माल की सुरक्षा सुनिश्चित करें.
हाथियों के हमले से एक भी इंसान की मृत्यु न हो यह वन विभाग सुनिश्चित करे. जानवरों के हमले से अगर किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उस घटना के 12 दिन के भीतर पीड़ित परिवार को मुआवजा की पूरी राशि मिलनी चाहिए. साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि एनिमल अटैक से संबंधित कंपनसेशन के जो भी प्रावधान पहले से बनाए गए हैं. उन नियमों में आवश्यक संशोधन कर पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाने के लिए एक प्रभावी नियमावली बनाई जाय. ऐसे मामलों में पीड़ितों को न केवल नियम के तहत राहत दी जाए, बल्कि उसमें कोई देरी नहीं हो यह सुनिश्चित की जाए.
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग अक्सर हिंसक जानवरों के हमले का शिकार होते हैं. जिससे उनकी न केवल मृत्यु होती है, बल्कि आजीविका के प्रमुख स्रोत फसल और पशुधन भी प्रभावित होते हैं. उन्होंने कहा कि वन्य जीव हमले से प्रभावित लोगों के साथ हमारी सरकार पूरी सहानुभूति रखती है और उन्हें न्यायसंगत तरीके से कंपनसेशन और सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पिछले 5 बर्ष में हुए कैजुअल्टी की संख्या एवं कंपनसेशन की संख्या से संबंधित डेटा राज्य सरकार को उपलब्ध कराने का निर्देश दिए तथा कहा कि राज्य के भीतर सभी एलिफेंट कॉरिडोर की मैपिंग की जाय.
मानव-हाथी संघर्ष जैसी घटनाओं पर हमारी सरकार संवेदनशील है. जानवरों के हमले से जीवन की क्षति, स्थायी दिव्यांगता, पशुधन संपत्ति और फसल नुकसान को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में हाथियों के हमलों से बड़ी संख्या में कैजुअल्टी की सूचना प्राप्त हुई है. राज्य के रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, लोहरदगा, गुमला, दुमका इत्यादि जिलों में हाथियों के हमलों से पिछले कुछ महीनों में लगभग 27 लोगों की मृत्यु हुई है. यह बेहद गंभीर बिषय है. उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में हाथियों द्वारा जानमाल की हानि पहुंचाई जा रही है.
उन क्षेत्रों के ग्रामीणों को बिशेष तकनीकी प्रशिक्षण देकर एलीफेंट रेस्क्यू टीम तैयार की जाय. ग्रामीण क्षेत्र से हाथी के विचलन को रोकने के लिए तमाम उपाय किए जांय. ग्रामीणों को मशाल जलाने के लिए डीजल एवं किरासन तेल, पुराने टायर, टॉर्च, सोलर सायरन इत्यादि उपलब्ध कराए जाएं, ताकि ग्रामीणों को हाथी भगाने में सहूलियत हो सके. वन विभाग प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर जागरूकता अभियान और सुरक्षा के जरूरी उपाय करे.
झारखंड में बड़ी संख्या में हाथी विचलन करते हैं. जंगल के इलाकों से कुछ हाथी भटक कर ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं. फिर वन विभाग इन हाथियों से ग्रामीणों को सुरक्षित करने के लिए अबतक कोई बेहतर मेकैनिज्म क्यों तैयार नहीं कर पाया है. वहीं मुख्यमंत्री के समक्ष अधिकारियों ने कहा कि वन विभाग द्वारा जल्द हाथियों से रेस्क्यू के लिए एक बेहतर क्विक रिस्पांसिबल मेकैनिज्म तैयार करने की योजना है.
विभाग द्वारा 6 कुनकी हाथी मंगाए जा रहे हैं. जिसकी मदद से ट्रेकिंग सिस्टम में सहयोग मिल सकेगा. वन विभाग जल्द ही प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को हाथियों से बचाव के लिए बिशेष प्रशिक्षण देगी. एलीफेंट रेस्क्यू सिस्टम को मजबूत बनाने को लेकर विभाग द्वारा एलीफेंट रेस्क्यू बिशेषज्ञ की मदद भी ली जाएगी.

