
उदित वाणी, रांची : झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला के रंगाटांड, बकराकोचा और कनियालुका जंगल में क्वार्ट्ज पत्थर के अवैध खनन और हाथियों की सुरक्षा से जुड़े मामले में सुनवाई की. खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार के वन व खान विभाग, पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को जबाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
अदालत ने संबंधित अधिकारियों से पूछा है कि अवैध खनन रोकने के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं. इस मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को निर्धारित की गई है. वहीं अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि इस अवधि में अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लगाई जाती है, तो खंडपीठ की ओर से स्वयं कड़े कदम उठाये जायेंगे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी हाल में अवैध खनन पर रोक लगाई जाय.
प्रार्थी के अधिवक्ता जितेश कुमार ने अदालत को बताया कि सरकार द्वारा दाखिल जबाब में भी यह स्वीकार किया गया है कि संबंधित क्षेत्र में अवैध खनन हो रहा है. लेकिन इसके रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है. इससे राज्य सरकार को राजस्व की भारी क्षति हो रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से खनन माफिया को खुली छूट मिली हुई है और वे बेखौफ होकर अवैध खनन कर रहे हैं और अवैध खनन से न केवल पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि क्षेत्र में विचरण करने वाले हाथियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है. इसको लेकर निरमा देवगम ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है.

