उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटानगर रेल सिविल डिफेंस की ओर से क्षेत्रीय रेलवे प्रशिक्षण संस्थान (जेडआरटीआई) सिनी में सर्पदंश निवारण, नियंत्रण एवं संरक्षण विषय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य रेलकर्मियों को जहरीले और विषहीन सांपों की पहचान, सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक उपचार तथा बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना था.
प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय रेलवे के बिलासपुर, खुर्दा, विशाखापट्टनम, चक्रधरपुर, रांची, आद्रा और खड़गपुर समेत नौ रेल मंडलों के करीब 190 रेलकर्मी शामिल हुए. इनमें स्टेशन मैनेजर, ट्रेन मैनेजर, टावर वैगन चालक और सहायक लोको पायलट प्रमुख रूप से उपस्थित रहे.
रेल सिविल डिफेंस के इंस्पेक्टर एवं राष्ट्रपति पदक सम्मानित सदस्य संतोष कुमार ने कहा कि रेलवे के कई कार्यस्थल जंगल, यार्ड और सुनसान इलाकों में स्थित हैं, जहां सर्पदंश का खतरा हमेशा बना रहता है. ऐसे में सही प्रशिक्षण ही सुरक्षा और बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है.
उन्होंने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन और डमी सर्पों के माध्यम से जहरीले एवं विषहीन सांपों की बनावट, पहचान और उनके व्यवहार की जानकारी दी. साथ ही बताया गया कि सांप के काटने के बाद शरीर पर बने निशानों और लक्षणों से भी विषैले सर्प की पहचान की जा सकती है. प्रशिक्षण में न्यूरोटॉक्सिक, हेमोटॉक्सिक और मायोटॉक्सिक जहर के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों की भी विस्तार से जानकारी दी गई.
संतोष कुमार ने बताया कि भारत में सांपों की लगभग 275 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें केवल 15 प्रतिशत ही विषैले होते हैं. इनमें भी करीब 20 प्रतिशत मामले ड्राई बाइट के होते हैं, जिसमें जहर शरीर में नहीं पहुंचता. उन्होंने कहा कि सर्पदंश होने पर घबराने के बजाय मरीज का मनोबल मजबूत रखना चाहिए तथा ओझा-गुनी और अंधविश्वास से बचते हुए तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए.
डेमोंस्ट्रेटर शंकर कुमार प्रसाद ने चोट लगने की स्थिति में विभिन्न प्रकार की बैंडेज तकनीकों का मॉक ड्रिल के माध्यम से प्रशिक्षण दिया. स्टेशन अधीक्षक विजय कुमार प्रसाद, वीरेंद्र कुमार और एस.के. बिस्वास ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे रेलकर्मियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया. अंत में जेडआरटीआई के मुख्य अनुदेशक संतोष कुमार झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया.


