
उदित वाणी, हजारीबाग: रैलीगढ़ा रोड सेल में पिछले सात दिनों से जारी मजदूरों का आंदोलन अब उग्र रूप लेता जा रहा है. कांटा घर के समीप अपनी मांगों को लेकर डटे 248 दंगल के मजदूरों का गुस्सा गुरुवार को उस समय सातवें आसमान पर पहुँच गया, जब स्थानीय विधायक और उनके बीच तीखी नोकझोंक हुई. मजदूरों का आरोप है कि मांडू विधायक ने न केवल उनकी मांगों को अनसुना किया, बल्कि उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया.
454 गाड़ियों की मजदूरी का है मामला
मजदूरों का कहना है कि रैलीगढ़ा रोड सेल से हाल के दिनों में कोयले का बड़े पैमाने पर उठाव किया गया है. नियमतः इसका भुगतान मजदूरों को होना चाहिए था, लेकिन 454 गाड़ियों की मजदूरी अब तक लंबित है. अपनी वाजिब मजदूरी की मांग को लेकर मजदूर एक सप्ताह से धरने पर बैठे हैं, लेकिन प्रबंधन या प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है.
विधायक के आगमन पर बढ़ा तनाव
आंदोलन स्थल पर जब मजदूरों की बैठक चल रही थी, तभी मांडू विधायक वहां पहुंचे. मजदूरों ने आरोप लगाया कि विधायक का रवैया सहानुभूतिपूर्ण होने के बजाय बेहद सख्त और अपमानजनक था.
मजदूरों का दावा: विधायक ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी प्रकार की मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाएगा.
अमर्यादित भाषा: मजदूरों ने आरोप लगाया कि विधायक ने कहा, “गाड़ियां हमारी लगेंगी और मजदूरों को कोई भुगतान नहीं होगा.” इसके साथ ही उन्होंने मजदूरों को देख लेने की धमकी भी दी.
जमकर हुई नारेबाजी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
विधायक के इस बयान के बाद मौके पर मौजूद मजदूरों ने उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की. तनाव बढ़ता देख विधायक अपनी गाड़ी में बैठकर रैलीगढ़ा कोलियरी की ओर रवाना हो गए. इस घटना ने जलती आग में घी डालने का काम किया है. रैलीगढ़ा रोड सेल संचालन समिति और मजदूरों ने स्पष्ट किया है कि वे इस तरह के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे.
मजदूरों की मांग और संकल्प
मजदूरों का कहना है कि वे गरीब हैं लेकिन अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं करेंगे. उन्होंने ऐलान किया है कि जब तक उनकी लंबित मजदूरी का भुगतान नहीं होता, तब तक वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे. विधायक के व्यवहार के विरोध में मजदूरों ने अब इस लड़ाई को और व्यापक बनाने का निर्णय लिया है.

