उदित वाणी, रांची : झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) की भाषा नियमावली को लेकर उत्पन्न विवाद के समाधान के लिए गठित पांच मंत्रियों वाली उच्चस्तरीय समिति की शुक्रवार को आयोजित दूसरी बैठक में भी सर्वसम्मति नहीं बन पाई.
बैठक के दौरान भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को जेटेट की परीक्षा में क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल करने के मुद्दे पर मंत्रियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए. अब इस पूरे विवाद पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के स्तर पर होने की संभावना है.
उल्लेखनीय है कि जेटेट की परीक्षा को लेकर भाषा नियमावली को हाल में कैबिनेट ने मंजूरी दी थी. इस नियमावली में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को क्षेत्रीय भाषा के तौर पर शामिल नहीं किए जाने पर विवाद उत्पन्न हो गया था. इसके बाद विवाद के समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पांच मंत्रियों की उच्चस्तरीय कमेटी गठित की थी. शुक्रवार को रांची में हुई इस समिति की बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने की.
बैठक में मंत्री संजय प्रसाद यादव और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को शामिल करने के पक्ष में नजर आए. उनका तर्क था कि सीमावर्ती जिलों के लाखों अभ्यर्थी इन भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें परीक्षा प्रक्रिया से बाहर रखना व्यावहारिक नहीं होगा.
बैठक में मौजूदा भाषा पैटर्न पर भी गंभीर सवाल उठे. समिति के कुछ सदस्यों ने उस नियम पर आपत्ति जताई, जिसके तहत अभ्यर्थियों के लिए 15 जनजातीय भाषाओं में से किसी एक का चयन अनिवार्य किया गया है.
सदस्यों का कहना था कि पलामू, गढ़वा और चतरा जैसे कई जिलों में इन भाषाओं का व्यवहारिक उपयोग बहुत कम है. ऐसे में वहां के युवाओं को नुकसान हो सकता है. बैठक में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने समिति की संरचना पर ही सवाल खड़ा कर दिया.
उन्होंने कहा कि भाषा और सांस्कृतिक पहचान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बनी समिति में अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व भी होना चाहिए. बैठक के दौरान कार्मिक और शिक्षा विभाग से यह आंकड़ा मांगा गया था कि पूर्व की परीक्षाओं में किस भाषा को कितने अभ्यर्थियों ने चुना था. हालांकि शुक्रवार की बैठक में भी विभाग स्पष्ट आंकड़े पेश नहीं कर सके.
इसे लेकर कई मंत्रियों ने नाराजगी जताई और विभागीय तैयारी पर सवाल उठाए. बैठक के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सभी सदस्यों के सुझाव और असहमति के बिंदुओं को संकलित किया जा रहा है. एक-दो दिनों में पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी.
(आईएएनएस)


