
उदित वाणी, रांची: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को धुर्वा के तिरिल स्थित झारखंड हाईकोर्ट के नये भव्य भवन का रिमोट का बटन दबाकर उध्दघाटन किया. इस अवसर पर अपने वक्तव्य में न्यायिक व्यवस्था की खामियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया.
राष्ट्रपति ने कहा कि जेल में बंद अंडरट्रायल कैदियों की मैं मदद नहीं कर सकती. लेकिन आज मैं विद्वान जजों व वकीलों के बीच हूं. जेलों में भीड़ बहुत ज्यादा है. वहां लोगों का जीवन दूभर है. ऐसे लोगों को जल्द न्याय मिलना चाहिए. वहीं उन्होंने कहा कि बहुत से केस हाईकोर्ट में फाइनल होते हैं. बहुत से केस का फैसला सुप्रीम कोर्ट से आता है.
जिनके पक्ष में फैसला आता है. वे खुश होते हैं. लेकिन कुछ दिनों के बाद उनकी खुशी गायब हो जाती है. क्योंकि उन्हें वास्तव में न्याय नहीं मिल पाता है. उदाहरण स्वरूप उन्होंने कहा कि मैं एक छोटे से आती हूं.
गांव में मैं एक फैमिली काउंसलिंग सेंटर की सदस्य थी. समिति के माध्यम से हमलोग कुछ केस फाइनल होने के बाद उसे देखते थे कि क्या उन्हें वास्तव में न्याय मिला या नहीं और हम पाते थे कि कई लोगों को वास्तविक न्याय नहीं मिला होता है. जज भी मानते हैं कि ऐसे कई केस होते हैं और लोग दोबारा केस करने से डरते हैं.
राष्ट्रपति ने कहा कि चीफ जस्टिस डॉ डीवाई चंद्रचूड़ ने मुझे बताया कि ऐसे मामलों में लोग कंटेंम्प्ट में जा सकते हैं. लेकिन लोग फिर से इतनी लंबी लड़ाई के लिए लोग तैयार भी नहीं होते. आप सभी बड़े जज बैठे है. वकील बैठे हैं.
कानून मंत्री यहां बैठे हैं और कई विद्वान लोग हैं. मुझे पता नहीं कि इसका रास्ता है या नहीं. मुझे लगता है लोगों को सही मायने में न्याय मिलना चाहिए. इसका रास्ता जरूर होगा. नियम हम बनाते हैं. वास्तविक न्याय दिलाने के लिए नियम नहीं है, तो नियम बनाना चाहिए. बहुत सारे ऐसे लोग मेरे पास आते हैं. अभी भी मेरे पास बहुत से लोगों की सूची है.
जिन्हें वास्तविक न्याय नहीं मिला. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया या सुप्रीम कोर्ट के बाद शायद कोई कोर्ट नहीं है. उनलोगों की सूची में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को भेज दूंगी.
वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट आज एक नया लैंडमार्क हासिल करने जा रहा है तथा झारखंड हाईकोर्ट की खूबियों व भव्यता की उन्होंने तारीफ की. इस प्रोजेक्ट में शामिल सभी लोगों की उन्होंने सराहना की. राष्ट्रपति ने कहा कि कोर्ट न्याय का मंदिर है.
जिला न्यायालयों को मिले समानता व स्वतंत्रता-डा डीवाई चंद्रचूड़
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉ डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायपालिका के भवन का विस्तार होने से न्यायपालिका की प्रतिष्ठा तो बढ़ती ही है. वहीं उन्होंने हिन्दी में भाषण देकर सबको प्रभावित किया.
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के द्वार में प्रवेश करते ही लोगों की आस्था को कायम रखना हम सबका उत्तरदायित्व है. सजा होने के पहले हजारों नागरिक छोटे अपराध के लिए महीनों या सालों तक जेलों में बंद रहते हैं न उनके पास साधन होता है और न साक्षरता. अगर न्यायपालिका से शीघ्र न्याय नहीं मिलेगा, तो लोगों का भरोसा कायम नहीं रह पाएगा.
उन्होंने कहा कि जिला व सत्र न्यायालयों को सशक्त बनाना भी उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय का कर्तव्य है. वहीं जिला न्यायालयों को समानता व स्वतंत्रता देने की पैरवी की. उन्होंने कहा कि तभी उनके कार्यों में हम गरिमा और गौरव डाल सकेंगे.
जिला न्यायालयों की गरिमा नागरिकों की गरिमा से जुड़ी है. न्याय प्रणाली का लक्ष्य लोगों को न्याय दिलाना है. इसके लिए समय पर सुनवाई हो. फैसले का दस्तावेज शीघ्र प्राप्त हो। कचहरी साफ सुथरा हो. वहां लोगों को भोजन और जल मिले. महिलाओं के लिए अलग शौचालय हो. लेकिन देश में अनगिनत कचहरियां हैं. जहां महिलाओं के लिए शौचालय भी नहीं है.
उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के माध्यम से आज हम न्याय व्यवस्था को प्रत्येक नागरिक के द्वार तक ले जाने का प्रयास कर रहे हैं. सर्वोच्च न्यायालय व हाईकोर्ट में अंग्रेजी में काम होता हैं. लेकिन अब स्थानीय भाषाओं का प्रयोग करना जरूरी हो गया है.
हमने 6.40 लाख गांवों तक पहुंचने के लिए एआई की मदद ली है. अदालत की कार्यवाही को लाइवस्ट्रीमिंग करने से उसे हर घर तक ले जाना महत्वपूर्ण प्रकल्प है. भारत सरकारने ईकोर्ट के फेज 3 में 7000 करोड़ रुपये दिया है.


