उदित वाणी, जमशेदपुर: गुड़ाबांदा के स्वर्णरेखा स्थित कड़ियामोहनपाल घाट से बालू के वैध उठाव को लेकर लंबे समय से जारी गतिरोध आखिरकार पूरी तरह समाप्त हो गया है। बनमाकड़ी पंचायत के रैयतों ने बालू परिवहन के लिए अपनी निजी जमीनों के उपयोग पर अपनी अंतिम सहमति दे दी है। रैयतों ने लीजधारक कंपनी गोदावरी कमोडिटीज लिमिटेड को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) सौंप दिया है, जिसके साथ ही क्षेत्र में वैध बालू खनन और सुचारू परिवहन का रास्ता साफ हो गया है।
सभी कानूनी प्रक्रियाएं और कागजी कार्रवाई पहले ही थीं पूरी
बताया जा रहा है कि गोदावरी कमोडिटीज लिमिटेड ने उच्चतम बोली लगाकर इस बालू घाट की लीज हासिल की थी। ग्रामसभा की सहमति, जिला प्रशासन की मंजूरी और लीज डीड से जुड़ी सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पहले ही पूरी कर ली गई थीं। केवल परिवहन मार्ग को लेकर रैयतों की लिखित सहमति बाकी थी, जो अब कंपनी को प्राप्त हो चुकी है।
कंपनी की योजना: लीजधारक कंपनी के अनुसार, अगले सप्ताह पूरे विधि-विधान और पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद कड़ियामोहनपाल घाट से बालू खनन एवं परिवहन कार्य विधिवत और पूर्ण रूप से शुरू कर दिया जाएगा।
13 मई की बैठक में ग्रामीणों ने दी लिखित सहमति
इस मुद्दे को सुलझाने के लिए बीते 13 मई को स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में निम्नलिखित प्रमुख लोगों की मौजूदगी रही:
मनमथ देहुरी (मुखिया, बनमाकड़ी पंचायत)
निरंजन माइती (ग्राम प्रधान, वृंदावनी)
राधेश्याम माइती (ग्राम प्रधान, आकाशछिड़ा)
इन सभी की गरिमामयी उपस्थिति में रैयतों ने सरकारी एवं निजी जमीन के उपयोग के लिए अपना लिखित सहमति पत्र प्रशासन और कंपनी को प्रदान किया।
स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार, ट्रैक्टर मालिकों की बढ़ेगी आय
स्वर्णरेखा नदी से वैध बालू उठाव शुरू होने से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को एक नई और सकारात्मक गति मिलने की पूरी उम्मीद है। परियोजना के विधिवत शुरू होने के बाद सैकड़ों स्थानीय मजदूरों को अपने गांव और घर के आसपास ही प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त, स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों को भी नियमित रूप से परिवहन का कार्य मिलेगा, जिससे उनकी आय में स्थायी बढ़ोतरी होगी।
अवैध खनन पर लगेगी रोक, सरकार को मिलेगा राजस्व
ग्रामीणों के हितों की पूरी सुरक्षा करने और स्थानीय लोगों को रोजगार में शत-प्रतिशत प्राथमिकता देने को लेकर लीजधारक कंपनी की ओर से ग्रामसभा में एक लिखित आश्वासन भी दिया गया है। क्षेत्र में वैध खनन शुरू होने से जहां एक ओर झारखंड सरकार को भारी मात्रा में राजस्व प्राप्त होगा, वहीं दूसरी ओर अवैध बालू खनन पर पूरी तरह से रोक लगेगी। इससे स्थानीय ग्रामीणों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।


