उदित वाणी, जमशेदपुर: टाटानगर रेलवे स्टेशन पर 6 नवंबर को आरपीएफ ने एक महिला से जंगली जीव जंतुओं की जो बरामदगी की है, उससे पहली बार खुलासा हुआ है कि टाटानगर भी वाइल्डलाइफ स्मगलिंग के इंटरनेशनल रैकेट का हिस्सा है.
जिस तरह के सांपों और दूसरे सरीसृपों की बरामदगी महिला के बैग से हुई है, उनमें से कई प्रजातियां ऐसी हैं जिनकी भारी डिमांड विदेशी बाजारों में है और एक ऐसा सांप बरामद हुआ है जिसकी कीमत इंटरनेशनल मार्केट में 25 करोड़ रुपये तक होती है और ऐसे दो सांप बरामद हुए हैं तो इनकी ही कुल कीमत 50 करोड़ रुपये पहुंचती है.
पूरी बरामदगी के बावत आकलन है कि इनकी इंटनेशनल मार्केट में कीमत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा होगी.
इंटरनेशनल रैकेट के रूट में टाटानगर
माना जा रहा है कि चीन-नेपाल के रास्ते भारत में सांपों की तस्करी हो रही है. तस्करी का रास्ता पूर्वोत्तर में नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश से बंगाल होते हुए दिल्ली और मुंबई तक पहुंचता है.
दिल्ली से इसे वैसे देशों में भेजा जाता है जहां इनकी और ज्यादा कीमत मिल सके. इस रूट में टाटानगर पहले से ही शामिल रहा होगा लेकिन आरपीएफ को मिले टिप ऑफ के बाद पहली बार इसका खुलासा हुआ है. जाहिर है कि आरपीएफ की नजर अब और पैनी होगी.
दिल्ली के कार्तिक गोयल और मेल्बिन जेली चैरियन को सौंपना था बैग
उल्लेखनीय है कि रविवार,6 नवंबर की रात टाटानगर आरपीएफ ने पुणे की देवी चंद्रा नाम की महिला को नीलांचल एक्सप्रेस से एक बैग के साथ गिरफ्तार किया था जिसमें से सांप, गिरगिट, छिपकलियां और दूसरे जीव बरामद हुए थे.
महिला ने पुलिस को पूछताछ में बताया है कि उसका काम महज कैरियर का है.वो कुत्तों का कारोबार करती है और अंश ट्रांसपोर्टेशन से जुड़ी है और उसी के ऑर्डर पर कुत्तों की डिलीवरी देने नागालैंड गई थी.
वहां दीमापुर में एक आदमी उसे मिला जिसने वो बैग उसे दिल्ली पहुंचाने को बोला था और बदले में उसे सात हजार रुपये कमीशन देने का वादा किया जिसमें से तीन हजार का ऑनलाइन भुगतान भी कर दिया गया था और बाकी रकम बैग पहुंचाने के बाद मिलनी थी. दिल्ली में कार्तिक गोयल और मेल्बिन जेली चैरियन नामक दो व्यक्तियों को वो बैग सौंपनेवाली थी.
कार्तिक गोयल जमशेदपुर में, पूछताछ जारी
घटना में आरोपी महिला ने दिल्ली के जिस कार्तिक गोयल का नाम लिया था, उसके जमशेदपुर पहुंचने की खबर है. सूत्रों के मुताबिक डीएफओ ममता प्रियदर्शी के कार्यालय में उससे पूछताछ चल रही है. हालांकि पूछताछ में क्या निकलकर आया, इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है.
करोड़ों रुपए में क्यों बिकता है सैंड बोआ सांप ?
महिला के पास से हुई बरामदगी में दो सैंड बोआ सांप मिले हैं.एक सांप की कीमत इंटरनेशलन मार्केट में 25 करोड़ रुपये तक दी जाती है और इसके पीछे वजह बड़ी है.
बताते हैं कि दुर्लभ प्रजाति के इन दो मुंहे सांपों का इस्तेमाल सेक्स पावर बढ़ाने के लिए बनाई जाने वाली दवाओं में होता है. इसके अलावा तंत्र मंत्र के लिए इस सांप का उपयोग होने के कारण इसकी तस्करी होने की बातें सामने आई हैं.
इस सांप का इस्तेमाल महंगे परफ्यूम बनाने के साथ ही नशे और कैंसर के इलाज में भी होने के कारण इसकी तस्करी विदेशों में की जाती है. इस सांप को अगर किसी व्यक्ति द्वारा मारा जाता है या फिर तस्करी करते पकड़ा जाता है, तो वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा 1972 के अंतर्गत उस व्यक्ति को 7 साल की बिना जमानत सजा और 35 हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है.
हालांकि इसे दोमुंहा कहा जाता है, लेकिन इसके दो मुंह नहीं होते,बल्कि इसकी पूंछ की बनावट ऐसी होती है जो मुंह की तरह ही दिखती है.
पालतू सांप बॉल पायथन
महिला के पास से एक बॉल पायथन (गेंदनुमा अजगर) भी बरामद हुआ है,हालांकि बैग में दम घुटने से इसकी मौत हो गयी. इन्हें बॉल पायथन इसलिए कहा जाता है कि संकट की स्थिति में ये खुद को गेंद की तरह गोल कर लेते हैं.
इसकी एक प्रजाति बनाना बनाना पायथन भी होती है जो सफेद और पीले रंग का होता है. इन सांपों को रॉयल पायथन माना जाता है, जो वेस्ट और सेंट्रल अफ्रीका के खुले जंगलों में काफी पाए जाते हैं. दिखने में तो इस प्रजाति के सांप काफी जहरीले लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. इनकी गिनती गैर-जहरीले सांपों में होती है और काफी विनम्र होते हैं.
ये बहुत कम एक्टिव रहते हैं और शांत स्वभाव के लिए जाने जाते हैं. इनके इस शांत स्वभाव की वजह से ही इन सांप के प्रजाति के सांपों को लोग पालना पसंद करते हैं और पालतू सांप के तौर पर रखते हैं. पालतू होने के कारण इनकी बड़ी मांग है और एक सांप की कीमत लगभग साढ़े चार लाख रुपये तक होती है.
स्किन का इस्तेमाल
बरामद सांपों और दूसरे जीवों का इस्तेमाल महिलाओं के लिए कीमती पर्स बनाने में भी होता है. हॉलीवुड की कई अभिनेत्रियां ऐसे जानवरों की स्किन से बने पर्स लेकर चलती हैं और पेटा के तमाम विरोध के बावजूद इन पर कोई लगाम नहीं लगी है.
कई बार महंगे परफ्यूम बनाने में भी इनका इस्तेमाल होता है. गुकी जैसे इंटरनेशनल ब्रांड का भी इसमें नाम आता रहा है. जाहिर है कि इनकी कीमत लाखों-करोड़ों तक पहुंचती है.
61 जंतुओं में से 6 मृत मिले
आरपीएफ ने कुल 71 सांप, छिपकिली, गिरगिट, कीड़े व दूसरे जीव बरामद किए थे जिनमेें से 5 मृत हो चुके थे. जाहिर है कि इनकी ट्रैफिकिंग के दौरान बरती गई लापरवाही ने इनकी जान ले ली. जिस महिला को बैग दिया गया था, उसने लापरवाही की थी या नहीं, यह भी जांच का विषय है.
वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के दिशा निर्देश में हो रही जांच
मामले की जांच वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के दिशा निर्देशों पर चल रही है. ब्यूरो केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के तहत आता है और देश में वन्य जीवों के प्रति संगठित अपराध की रोकथाम और कार्रवाई के लिए अधिकृत है.
इसका मुख्यालय नई दिल्ली मेें है और दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और जबलपुर में इसके क्षेत्रीय कार्यालय हैं. इसके अलावा रामनाथपुरम, गोरखपुर, मोतिहारी, नाथुला और मोरेह में इसके सीमांत कार्यालय हैं. ब्यूरो का गठन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 38 (जेड) के तहत किया गया था.
कोलकाता के निजाम पैलेस में ब्यूरो के ईस्टर्न रीजनल डिप्टी डायरेक्टर का कार्यालय है और झारखंड समेत पूर्वी भारत के कई राज्य उन्हीं के अधीन आते हैं.
क्या-क्या बरामद हुआ:
# बॉल पाइथन (अजगर) : 1 (मृत)
# रेड पाइथन : 4 (जिंदा)
# सैंड बोआ सांप : 2 (जिंदा)
# एल्बिनो पाइथन : 1 (जिंदा)
# रेटीकुलेटेड पाइथन (जालीदार अजगर: 1 (जिंदा)
# बर्मीज पाइथन : 1 (जिंदा)
# यूरोपियन रिनोसेरोस बीटल (कीड़े) : 9 (जिंदा)
# ग्रीन आइगुयाना रेप्टाइल्स (गिरगिट की प्रजाति) : 10 (जिंदा)
# छिपकिली : 8 जिंदा और 5 मृत
# अपरिचित कीड़े : 9 (जिंदा)


