उदित वाणी, जमशेदपुर : शहर में हाल ही में अपेंडिसाइटिस के उपचार के दौरान हुई एक दुखद घटना ने चिकित्सा जगत और प्रशासन के बीच गंभीर बहस खड़ी कर दी है. एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद दवा के रिएक्शन से उत्पन्न जटिलताओं के कारण एक मरीज की मृत्यु हो गई. इस घटना पर जहां शोक और संवेदना व्यक्त की जा रही है, वहीं इलाज कर रहे चिकित्सकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (हत्या) लगाए जाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की जमशेदपुर इकाई ने इस कार्रवाई को पूरी तरह अनुचित और कानून की गलत व्याख्या बताया है. संगठन का कहना है कि चिकित्सा विज्ञान स्वभावतः जटिल है और इसमें हर उपचार के साथ कुछ जोखिम जुड़े होते हैं, विशेषकर एनेस्थीसिया जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं में. तमाम सावधानियों और स्थापित मेडिकल प्रोटोकॉल के पालन के बावजूद भी अप्रत्याशित परिणाम सामने आ सकते हैं.
आईएमए के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि किसी चिकित्सकीय जटिलता या दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम को “हत्या” की श्रेणी में रखना न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि यह चिकित्सा पेशे के साथ गंभीर अन्याय भी है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया अपने कई ऐतिहासिक फैसलों में स्पष्ट कर चुका है कि चिकित्सकों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई केवल तभी होनी चाहिए जब ‘गंभीर लापरवाही’ प्रमाणित हो. सामान्य जटिलताओं या चिकित्सा निर्णय में हुई त्रुटियों को आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता.
इस मामले में आईएमए ने संबंधित चिकित्सकों—डॉ. अशरफ बदर और डॉ. अजय प्रसाद—के प्रति पूर्ण समर्थन जताया है. संगठन का कहना है कि दोनों डॉक्टरों ने अपनी पेशेवर जिम्मेदारी के तहत उपचार किया और किसी भी प्रकार की जानबूझकर लापरवाही का आरोप निराधार है.
घटना के बाद स्थिति तब और गंभीर हो गई जब डॉ. अशरफ बदर के साथ कथित रूप से हाथापाई की गई. आईएमए ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि चिकित्सकों पर इस प्रकार का हमला अस्वीकार्य है और इससे पूरे मेडिकल समुदाय में भय का माहौल पैदा होता है. संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि हमले में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.
आईएमए जमशेदपुर ने यह भी घोषणा की है कि जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल पीयूष पांडे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात करेगा. इस मुलाकात में धारा 103 को तत्काल हटाने, मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक सक्षम मेडिकल बोर्ड के गठन और चिकित्सक पर हमले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी.
संगठन का कहना है कि चिकित्सा क्षेत्र हमेशा से जनसेवा और मरीजों के कल्याण के लिए समर्पित रहा है. लेकिन यदि चिकित्सकों को हर जटिल परिणाम के लिए आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ेगा, तो यह न केवल उनके मनोबल को तोड़ेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक प्रभाव डालेगा.
आईएमए ने प्रशासन से अपील की है कि इस मामले को संवेदनशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए, ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके और चिकित्सा पेशे में विश्वास बना रहे.

