
उदित वाणी झारखंड: जमशेदपुर के रहने वाले ललित किशोर को अंततः एक लंबे और कड़े संघर्ष के बाद उनकी ग्रेच्युटी (उपादान) का हक मिल गया है। शुक्रवार को जमशेदपुर के माननीय उप श्रमायुक्त (DLC) अरविन्द कुमार के हाथों ललित किशोर को उनके ग्रेच्युटी भुगतान का चेक सौंपा गया। इस जीत से पीड़ित कर्मचारी के चेहरे पर खुशी लौट आई है।
स्कूल प्रबंधन कर रहा था आनाकानी
ललित किशोर ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके हक की यह लड़ाई बेहद लंबी और थका देने वाली रही। करीब 6 साल की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद साल 2024 में ही कोर्ट द्वारा उपादान (Gratuity) भुगतान का आदेश जारी कर दिया गया था। इसके बावजूद, संबंधित स्कूल प्रबंधन पैसा देने में लगातार आनाकानी कर रहा था और टालमटोल का रवैया अपनाए हुए था।
रिकवरी केस के जरिए निकाला गया रास्ता
स्कूल प्रबंधन के अड़ियल रुख को देखते हुए ललित किशोर ने हार नहीं मानी। इसके बाद न्याय के लिए एक अन्य रिकवरी केस दर्ज कराया गया। इस संबंध में ललित किशोर ने कहा: इस रिकवरी प्रक्रिया में माननीय उप श्रमायुक्त महोदय अरविन्द कुमार का बहुत बड़ा सहयोग रहा, जिनके कड़े रुख और उचित हस्तक्षेप के कारण स्कूल प्रबंधन से आखिरकार पैसा निकलवाया जा सका।”
अधिवक्ता श्री प्रणव कुमार चैटर्जी और साथियों का जताया आभार
कुल 8 वर्षों के अनवरत प्रयास और मानसिक संघर्ष के बाद मिली इस ऐतिहासिक जीत पर ललित किशोर ने अपने अधिवक्ता श्री प्रणव कुमार चैटर्जी का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके अधिवक्ता ने सही कानूनी दिशा में केस को लड़ा और आखिरकार जीत दिलाई। इसके साथ ही उन्होंने इस मुश्किल दौर में कदम-कदम पर हौसला बढ़ाने वाले अपने सभी दोस्तों और साथी कर्मचारियों को भी धन्यवाद दिया।
शोषण के खिलाफ एक मिसाल
इस कानूनी जीत के बाद ललित किशोर ने उम्मीद जताई कि उनका यह मामला समाज और उद्योग क्षेत्र के उन तमाम कर्मचारियों के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणा का काम करेगा, जो आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं या प्रबंधन के इस तरह के शोषण का शिकार हो रहे हैं।

