
उदित वाणी, जमशेदपुर : आज सुबह उत्क्रमित उच्च विद्यालय झांटीझरना जाने वाले शिक्षकों के बीच उस समय दहशत का माहौल छा गया, जब विद्यालय जाने के मुख्य मार्ग पर हाथियों का ताजा लीद (गोबर) दिखाई दिया. पिछले कुछ दिनों से झांटीझरना, बासाडेरा, डायनमारी और फुलझड़ी जैसे क्षेत्रों में हाथियों का झुंड लगातार देखा जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों और विशेषकर शिक्षकों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है.
रास्ते में जगह-जगह हाथियों की मौजूदगी के निशान
उर्दू शिक्षक डॉ. कमर अली जब विद्यालय जाने के लिए निकले, तो घाटी के रास्ते में उन्हें कई जगह ताजा लीद नजर आई. इससे यह स्पष्ट हो गया कि हाथियों का झुंड कुछ ही समय पहले वहाँ से गुजरा है. जंगली हाथियों की इस सक्रियता के बावजूद शिक्षक अपनी ड्यूटी निभाने के लिए जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुँचने को मजबूर हैं.
जर्जर सड़क ने बढ़ाया जान का खतरा
डॉ. कमर अली ने मार्ग की दयनीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि अचानक हाथी सामने आ जाए, तो उनके पास भागने का कोई विकल्प नहीं है. पूरा रास्ता नुकीली गिट्टियों से भरा हुआ है, जहाँ वाहन तेज चलाना असंभव है. संभल-संभल कर आगे बढ़ने के कारण वे हाथियों के हमले की स्थिति में असुरक्षित हो जाते हैं.
25 साल बाद भी फाइलों में अटकी सड़क
यह स्थिति स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सरकार के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती है. झारखंड राज्य बने 25 साल बीत जाने के बाद भी यह महत्वपूर्ण सड़क आज तक नहीं बन पाई है. जर्जर बुनियादी ढांचे और जंगली जानवरों के खतरों के बीच काम कर रहे इन शिक्षकों ने व्यवस्था के प्रति गहरी नाराजगी जताई है.

