
उदित वाणी, जमशेदपुर : जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) ने मोटर वाहन दुर्घटना दावा (MACT) के मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए शनिवार को सिविल कोर्ट स्थित लोक अदालत हॉल में एक महत्वपूर्ण जिलास्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया.
जांच प्रक्रिया के लिए 60 दिनों की डेडलाइन
कार्यशाला में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटना होने के बाद पुलिस पदाधिकारियों के लिए 60 दिनों के भीतर जांच प्रक्रिया पूरी कर फाइनल रिपोर्ट सक्षम प्राधिकार को समर्पित करना अनिवार्य है. जांच में देरी से मुआवजा मिलने की प्रक्रिया बाधित होती है, इसलिए समय सीमा का पालन करना बेहद जरूरी है.
मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर और नालसा (NALSA) सॉन्ग के साथ हुआ. मुख्य अतिथि के रूप में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-1 (MACT स्पेशल कोर्ट जज) कनकन पट्टदार उपस्थित थे. विशिष्ट अतिथियों में:
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-2 आनंद मणि त्रिपाठी
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-3 नीति कुमार
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-4 नमिता चंद्रा
डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी
इसके साथ ही अधिवक्ता सतेन्द्र कुमार सिंह और सुनील कुमार स्वाईं ने भी अपने विचार साझा किए.
बीएनएस (BNS) के प्रावधानों और एआईआर (AIR) पर चर्चा
कार्यशाला में विभिन्न थानों के पुलिस पदाधिकारियों, एलएडीसी और पीएलवी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) के मोटर वाहन दुर्घटना प्रावधानों की जानकारी दी गई. बताया गया कि एक्सीडेंट इंफोर्मेशन रिपोर्ट (AIR) की कॉपी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के साथ-साथ सक्षम कोर्ट और डालसा को भी सौंपनी होगी ताकि मुआवजे का त्वरित भुगतान हो सके.
समारोह का समापन
कार्यशाला में रिपोर्ट भरने के लिए निर्धारित विभिन्न प्रपत्रों (Forms) की जानकारी दी गई. अंत में सहायक एलएडीसी योगिता कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ.

