उदित वाणी, जमशेदपुर : गुड़ाबांदा प्रखंड के अंगारपाड़ा स्थित बनमाकड़ी लैम्पस में धान खरीद में कथित बड़े फर्जीवाड़े को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है. प्रभारी प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी (बीसीओ) जितेंद्र कुमार भगत द्वारा की गई जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पूरी जांच प्रक्रिया को गोपनीय तरीके से अंजाम देकर महज 24 घंटे के भीतर आरोपियों को क्लीन चिट देने की कोशिश की गई.
अंगारपाड़ा के ग्राम प्रधान सुनील बास्के और केंदुआपाल के ग्राम प्रधान अमुल्य कुमार बेरा ने कहा कि जांच अधिकारी क्षेत्र में कब आए और कब लौट गए, इसकी जानकारी तक किसी स्थानीय जनप्रतिनिधि या शिकायतकर्ता किसान को नहीं दी गई. उप प्रमुख रतन लाल राउत, उप मुखिया समेत किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि को जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया. ग्रामीणों का आरोप है कि बनमाकड़ी लैम्पस उद्घाटन के दिन के बाद कभी नियमित रूप से खुला ही नहीं, लेकिन कागजों में लाखों रुपये की धान खरीद दिखा दी गई. आरोप है कि संचालक द्वारा अपने परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी किसान आईडी बनाकर धान बिक्री दर्शाई गई.
उप प्रमुख रतन लाल राउत ने दावा किया कि सरकारी रिकॉर्ड में लैम्पस संचालक के परिवार के नाम पर 41.41 एकड़ जमीन दर्शाकर तीन अलग-अलग किसान आईडी बनाई गईं और 374 क्विंटल धान की बिक्री दिखाई गई. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि परिवार के पास इतनी बड़ी कृषि भूमि है तो फिर वे पीएच राशन कार्ड धारक कैसे हैं. उन्होंने इसे “दोहरा भ्रष्टाचार” बताते हुए कहा कि गरीबों के लिए बने राशन कार्ड का लाभ लेने के साथ-साथ उसी जमीन के आधार पर धान बेचकर सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया.
केंदुआपाल के ग्राम प्रधान अमुल्य कुमार बेरा ने भी आरोप लगाया कि संचालक जवाहरलाल बारिक के हिस्से में वास्तविक रूप से केवल 3 से 4 बीघा जमीन ही है, जबकि बाकी जमीन और किसान आईडी फर्जी तरीके से तैयार की गई हैं.
मामले में नया मोड़ तब आया जब जांच अधिकारी जितेंद्र कुमार भगत ने स्वीकार किया कि उन्होंने केवल उस किसान आईडी की जांच की, जिससे धान बेचा गया था. उन्होंने यह भी कहा कि आईडी कैसे बनी और जमीन के रिकॉर्ड की सत्यता की जांच उनके स्तर से नहीं की गई. ग्रामीणों का कहना है कि मूल शिकायत ही फर्जी जमीन और फर्जी किसान आईडी बनाकर धान खरीद करने की थी, लेकिन जांच में उसी बिंदु को नजरअंदाज कर दिया गया.
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन पर लीपापोती का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष और व्यापक जांच नहीं हुई तो पूरे प्रखंड में उग्र जन आंदोलन शुरू किया जाएगा. उनका कहना है कि वास्तविक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ दिलाने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए वे संघर्ष जारी रखेंगे.


