उदित वाणी, जमशेदपुर : शहर के प्रतिष्ठित शिक्षाविद, समाजसेवी और गोविंद विद्यालय (तमोलिया) के संस्थापक निदेशक डॉ. ब्रह्म दत्त शर्मा का आज तड़के सुबह 3:00 बजे उनके ‘ब्रह्म निवास’ पर निधन हो गया। वे 85 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर मिलते ही शहर के शिक्षा, साहित्य और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है।
शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण
डॉ. शर्मा की शैक्षिक यात्रा वर्ष 1960 में ‘राजस्थान विद्या मंदिर’ में एक शिक्षक के रूप में शुरू हुई थी। अपनी कर्मठता और जुझारू व्यक्तित्व के कारण वे गुरु नानक स्कूल (मानगो) के प्रधानाचार्य पद तक पहुँचे। सेवानिवृत्ति के बाद, समाज को एक नई दिशा देने और शिक्षा जगत में कुछ अद्वितीय करने के संकल्प के साथ उन्होंने गोविंद विद्यालय की स्थापना की। आज यह विद्यालय एक विशाल वटवृक्ष की तरह हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवार रहा है।
साहित्य और समाजसेवा में योगदान
शिक्षा के साथ-साथ डॉ. शर्मा साहित्य जगत के भी देदीप्यमान नक्षत्र थे। उन्होंने कई वर्षों तक प्रसिद्ध राजस्थानी पत्रिका ‘कुरजां’ का संपादन किया। वे ‘राजस्थान नवयुवक संघ’ के संस्थापक और अध्यक्ष भी रहे। समाजसेवा के प्रति उनके लगाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अनगिनत संस्थाओं को निस्वार्थ भाव से आर्थिक और वैचारिक सहयोग प्रदान किया।
गोविंद विद्यालय परिवार में शोक
गोविंद विद्यालय परिवार ने अपने मार्गदर्शक को अश्रुपूरित नेत्रों से श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डॉ. शर्मा का व्यक्तित्व सम्मोहक और प्रेरणादायी था। विद्यालय का कण-कण उनका ऋणी है। अपने अंतिम दिनों में भी वे शिक्षकों को बेहतर करने के लिए प्रेरित करते रहते थे। उनके आदर्श और सिद्धांत आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक का कार्य करेंगे।
सम्मानों से सुशोभित रहा सफर
शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें कई राज्य और राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उनका पूरा जीवन “सादा जीवन, उच्च विचार” का जीवंत उदाहरण रहा।


