
उदित वाणी , रांची/जमशेदपुर: झारखंड की धरती के महान क्रांतिकारी और ‘चुआड़ विद्रोह’ के महानायक वीर शहीद गंगा नारायण सिंह की 236वीं जयंती इस वर्ष ऐतिहासिक भव्यता के साथ मनाने की तैयारी है. आगामी 25 अप्रैल को जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में आयोजित होने वाले इस विराट समारोह के लिए भूमिज समाज ने अपनी कमर कस ली है. इसी सिलसिले में पोटका विधायक संजीव सरदार के नेतृत्व में भूमिज समाज के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड मंत्रालय, रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से शिष्टाचार भेंट की और उन्हें समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया.
मुख्यमंत्री और मंत्रियों को सौंपा गया निमंत्रण पत्र
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और शहीद गंगा नारायण सिंह के योगदान को याद किया. विधायक संजीव सरदार ने मुख्यमंत्री को बताया कि यह आयोजन केवल एक जयंती समारोह नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक और क्रांतिकारी पहचान को सशक्त करने का एक माध्यम है.
मुख्यमंत्री के अलावा, प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ और अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री चमरा लिंडा से भी मुलाकात की. मंत्रियों को निमंत्रण सौंपते हुए समाज के गौरवशाली इतिहास और आंदोलन की गौरवगाथा से अवगत कराया गया. प्रतिनिधिमंडल में संजय सरदार, हिमांशु सिंह, राधेश्याम भूमिज, ईश्वर लाल सरदार, अमर सिंह भूमिज, अमल सरदार, सागर सरदार, प्रोरंजन सरदार और भुगुराय सरदार जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल थे.
50 हजार से अधिक लोगों के जुटने का अनुमान
आयोजन समिति ने इस वर्ष के समारोह को अब तक का सबसे बड़ा आयोजन बनाने का लक्ष्य रखा है.
विशाल जनभागीदारी: कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों (पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां) के अलावा पड़ोसी राज्यों ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी भूमिज समाज के लोगों के पहुँचने की उम्मीद है. अनुमान है कि 50,000 से अधिक लोग गोपाल मैदान में जुटेंगे.
सांस्कृतिक महाकुंभ: कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना और शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ होगी. इसके बाद एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें शहीद गंगा नारायण सिंह के जीवन संघर्ष पर चर्चा होगी.
पारंपरिक स्टॉल और नृत्य: मैदान में भूमिज समाज की कला, संस्कृति और खान-पान को प्रदर्शित करने के लिए विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे. दोपहर में पाइका और अन्य पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुति होगी, जबकि शाम को एक विशाल जनसभा का आयोजन होगा.
यह आयोजन भूमिज समाज की एकजुटता और वीर शहीदों के प्रति राज्य की कृतज्ञता को दर्शाने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगा.

