उदित वाणी, जमशेदपुर: माप तौल क़ानून के प्रावधानों को क्रिमिनल अपराध की श्रेणी से बाहर करने के मुद्दे पर केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय ने नई दिल्ली में एक बुलाई थी.
बैठक में कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि उक्त क़ानून की अनेक धाराओं में छोटी मोटी भूलों अथवा गलतियों के लिए भी सिविल धाराओं की बजाय क्रिमिनल धाराओं के अंतर्गत केस दर्ज़ किया जाता है जो न्यायोचित नहीं है.
खंडेलवाल ने कहा की माप तौल विभाग के अधिकारियों को भी चालान करने के मामलों में इलेक्ट्रॉनिक मशीन दी जाए. उन्होंने माप तौल क़ानून में आवश्यक संशोधन करने के केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि 2011 में बने इस क़ानून में न्याय के प्राकृतिक सिद्धांत की अनदेखी की गई थी जिसे मोदी सरकार ने ठीक करने का निर्णय लिया है.
इस निर्णय से देश के व्यापारी वर्ग को बड़ा लाभ होगा. उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने बताया की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इज ऑफ डूइंग बिज़नेस विज़न के तहत मंत्रालय माप तौल क़ानून एवं नियमों के कुछ प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखे जाने के बारे में सक्रिय रूप से विचार कर रहा है.
उन्होंने बताया की इस मामले में केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री पियूष गोयल ने अधिकारीयों को इस दिशा में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं जिसके अनुसार विभाग में शीर्ष स्तर पर स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा कर ऐसे प्रावधानों को चिन्हित किया गया है और उनमें संशोधन करने की प्रक्रिया पर काम जारी है.

