
उदित वाणी, जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी तट पर 226 किलो वजनी जिंदा मिसाइल बम मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। बालू खुदाई के दौरान मिली संदिग्ध वस्तु की जांच में इसके अत्यंत खतरनाक बम होने की पुष्टि होते ही प्रशासन हरकत में आ गया और पूरे क्षेत्र को घेरकर सील कर दिया गया।
मंगलवार (17 मार्च 2026) की रात पानीपड़ा-नागुदसाई गांव के पास ग्रामीणों को नदी में एक भारी-भरकम लोहे की वस्तु दिखाई दी। शुरुआत में इसे सामान्य धातु या गैस सिलेंडर समझा गया, लेकिन जांच में यह 500 पाउंड (करीब 226 किलो) का शक्तिशाली अमेरिकी निर्मित बम निकला, जो अब भी सक्रिय स्थिति में है।
इलाके में दहशत, सुरक्षा कड़ी
बम मिलने की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। खतरे को देखते हुए आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह खाली कराया गया और लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सख्त चेतावनी दी गई है। बम निरोधक दस्ता भी मौके पर पहुंचकर निगरानी कर रहा है। ग्रामीण पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और हर स्तर पर सतर्कता बरती जा रही है।
सेना करेगी निष्क्रिय
बम की संवेदनशीलता को देखते हुए मामले को भारतीय सेना को सौंप दिया गया है। सेना की विशेषज्ञ टीम जल्द ही स्थल पर पहुंचकर तकनीकी जांच के बाद बम को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करेगी। इसके लिए पश्चिम बंगाल स्थित कलाईकुंडा वायुसेना केंद्र के विशेषज्ञों से भी संपर्क किया गया है।
बम की पहचान और क्षमता
जांच में सामने आया कि यह ‘एएन-एम64’ श्रेणी का उच्च विस्फोटक हवाई बम है, जिसका वजन लगभग 500 पाउंड है। इसमें बड़ी मात्रा में शक्तिशाली विस्फोटक भरा होता है, जो विस्फोट होने पर 300 से 400 फीट तक घातक प्रभाव डाल सकता है और मजबूत संरचनाओं को भी नष्ट करने की क्षमता रखता है।
कैसे पहुंचा बम, जांच जारी
बम के यहां मिलने को लेकर कई संभावनाएं जताई जा रही हैं। विशेषज्ञ इसे द्वितीय विश्व युद्ध काल का मान रहे हैं, जब इस क्षेत्र के आसपास वायुसेना के अड्डों से सैन्य गतिविधियां संचालित होती थीं। वहीं कुछ लोग इसे 1971 के भारत-पाक युद्ध या किसी पुराने विमान दुर्घटना से जोड़कर भी देख रहे हैं।
आज भी क्यों है खतरनाक
विशेषज्ञों के अनुसार, इतने पुराने होने के बावजूद बम के अंदर मौजूद विस्फोटक पदार्थ रासायनिक रूप से स्थिर रहते हैं। हल्का झटका, घर्षण या अधिक गर्मी भी इसे सक्रिय कर सकती है, इसलिए इसे अत्यंत सावधानी के साथ निष्क्रिय किया जाना जरूरी है।
AN-M64 500 lb अमेरिकी बम के बारे में तकनीकी विनिर्देश (Technical Specifications)
• प्रकार: यह एक ‘जनरल पर्पस’ (GP) हाई-एक्सप्लोसिव एरियल बम है।
• वजन: इसका नाममात्र वजन 500 पाउंड (लगभग 227 किलो) है, लेकिन विस्फोटक और खोल के आधार पर यह 230 से 250 किलो तक हो सकता है।
• विस्फोटक: इसमें लगभग 119 किलो हाई-एक्सप्लोसिव (मुख्यतः TNT या एमाटोल) भरा होता है।
• बनावट: इसकी बाहरी परत मोटे स्टील की बनी होती है, जो इसे जमीन या कंक्रीट के अंदर धंसने के बाद फटने की शक्ति देती है।विस्फोट का प्रभाव (Impact)
• तबाही का दायरा: इस आकार के बम के फटने पर घातक छर्रों (Fragmentation) का दायरा 300 से 400 फीट तक होता है।
• इमारतों पर असर: यह रेलवे ट्रैक, गोला-बारूद के गोदामों, हल्के जहाजों और कंक्रीट की इमारतों को पूरी तरह ध्वस्त करने में सक्षम है।
• गड्ढा (Crater): अगर यह जमीन की सतह पर फटता है, तो लगभग 20-30 फीट चौड़ा और गहरा गड्ढा बना सकता है।
इसका उपयोग कब और कहाँ हुआ?
1. द्वितीय विश्व युद्ध (1941–1945): यह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना (USAAF) और ब्रिटिश वायुसेना (RAF) द्वारा इस्तेमाल किया गया सबसे आम बम था। इसे जर्मनी, इटली और एशिया में जापानी ठिकानों पर गिराया गया था।
2. कोरियाई युद्ध (1950–1953): इसका बड़े पैमाने पर उपयोग कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया गया था।
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