उदित वाणी, आदित्यपुर : महाराष्ट्र के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल शिरडी साईं (Shirdi Sai) से करीब 1600 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करके ‘नन्दी भगवान’ सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर पहुंचे हैं. हट्टे-कट्टे और करीब 22 वर्षीय इन ‘नन्दी भगवान’ को पीले रंग के विशेष लिबास में आदित्यपुर क्षेत्र का भ्रमण करते हुए देखा जा रहा है. वे यहाँ विभिन्न मोहल्लों में घर-घर और द्वार-द्वार घूम-घूमकर भिक्षाटन भी कर रहे हैं. नन्दी भगवान के शरीर की दिव्य और गठीली बनावट को देखकर एक बारगी लोग इन्हें संगमरमर की मूरत या किसी मंदिर के नंदी भगवान समझ बैठते हैं, लेकिन वास्तविकता में यह साक्षात नंदी महाराज हैं.
नुकीली सींग और भीम जैसी गठीली बनावट है आकर्षण का केंद्र
आदित्यपुर और आसपास के स्थानीय आम लोगों के लिए ये नन्दी भगवान इस समय भारी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. उनके शरीर की बनावट किसी गठीले भीम की तरह सुदृढ़ है, जबकि उनकी सींग एक नुकीले कील की तरह दिखाई देती है. इसके साथ ही उनके माथे पर लगा भव्य चंदन का तिलक लोगों का मन मोह रहा है. इस अनोखे और अलौकिक दृश्य को देखने के लिए आदित्यपुर में लोगों की खासी भीड़ जुट रही है.
4 महावत हैं सेवा में तैनात, जगन्नाथ पुरी धाम के लिए होंगे रवाना
इन नन्दी भगवान की देखरेख और सेवा में कुल 4 महावत लगातार शामिल हैं. महावतों से मिली जानकारी के अनुसार, वे सभी एक लंबी धार्मिक तीर्थ यात्रा पर निकले हैं. शिरडी से शुरू हुई इस यात्रा के पड़ाव के तहत वे आदित्यपुर पहुंचे हैं और यहाँ से निकलकर उनका अगला लक्ष्य ओडिशा के प्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी धाम (Jagannath Puri Dham) तक जाना है. पुरी धाम की ओर प्रस्थान करने से पहले वे आदित्यपुर क्षेत्र के श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे हैं.


