
उदित वाणी, आदित्यपुर : आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के वॉर्ड संख्या-08 अंतर्गत बीको मोड़ (गम्हरिया) स्थित काली मंदिर श्मशान घाट में बना विद्युत शवगृह (Gas Fire Crematorium) आज प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है. उद्घाटन के तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी यह जनता के काम नहीं आ सका है और महज एक शोभा की वस्तु बनकर रह गया है.
₹3.17 करोड़ की लागत और कबाड़ में तब्दील मशीनें
उल्लेखनीय है कि नगर विकास और आवास विभाग (जुडको) द्वारा 15वें वित्त आयोग की राशि से 3.17 करोड़ रुपये की लागत से इस शवगृह का निर्माण कराया गया था. इसका उद्घाटन 31 मार्च 2023 को तत्कालीन मंत्री चम्पाई सोरेन, सांसद गीता कोड़ा, तत्कालीन महापौर विनोद श्रीवास्तव और अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा किया गया था. आज स्थिति यह है कि मशीनों का एक बार भी उपयोग नहीं हुआ है और वे परिसर में कबाड़ की तरह पड़ी हैं.
खंडहर बनता परिसर और झाड़ियों का साम्राज्य
श्मशान घाट के पुजारी कृष्ण गोराई ने बताया कि देखरेख न होने के कारण पूरा परिसर झाड़ियों से भर गया है. लोहे के गेट और ईंट की दीवारों को दीमक नुकसान पहुँचा रहे हैं. बिना उपयोग के ही यह भवन खंडहर का रूप ले रहा है. वर्तमान में लोग अभी भी पारंपरिक रूप से लकड़ी से ही शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं, क्योंकि शवगृह अब तक शुरू ही नहीं हुआ.
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
इस समस्या पर संज्ञान लेते हुए महापौर संजय सरदार ने कहा कि वे इस संबंध में नगर निगम के प्रशासक से विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे. उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी तकनीकी या आधिकारिक प्रक्रियाएं अधूरी हैं, उन्हें पूर्ण कराकर विद्युत शवगृह को शीघ्र चालू कराया जाएगा ताकि स्थानीय लोगों को इसका लाभ मिल सके.

