
उदित वाणी, रांची : झारखंड को झकझोर देने वाले एक भयावह मामले में रांची पुलिस ने एक नाबालिग लड़की की हत्या का खुलासा किया है, जिसकी कथित तौर पर एक व्यक्ति और उसके बेटे ने ‘सामाजिक कलंक’ के कारण हत्या कर दी थी.
आरोपियों ने सबूत मिटाने के प्रयास में लड़की के शव को गुपचुप तरीके से बिहार के गया ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया.
यह मामला रातू पुलिस थाना क्षेत्र से लड़की के अचानक लापता होने की जांच के दौरान सामने आया. जो मामला शुरू में गुमशुदा व्यक्ति का लग रहा था, वह जल्द ही हत्या की जांच में बदल गया, जिससे घर के भीतर किए गए एक बेहद घिनौने अपराध का खुलासा हुआ.
पुलिस के अनुसार मुख्य रांची के रातू जिले के झखरा टांड का निवासी आरोपी सुबोध पाठक लगभग आठ साल पहले एक गरीब परिवार से लड़की को अपने साथ लाया था और उसे अपनी बेटी की तरह पाला था. हालांकि, कुछ दिन पहले वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई. पड़ोसियों द्वारा परिवार से पूछताछ करने पर, वे कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पाए, जिससे इलाके में दहशत फैल गई.
2 अप्रैल की रात को तनाव तब और बढ़ गया जब ग्रामीणों ने आरोपी के घर के बाहर इकट्ठा होकर किसी साजिश का संदेह जताया.
सूचना के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की टीम के साथ घर की तलाशी ली, हालांकि शुरुआती जांच में कुछ भी नहीं मिला.
3 अप्रैल को एफआईआर दर्ज की गई और रांची के एसएसपी के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया. तकनीकी निगरानी और अन्य सुरागों का इस्तेमाल करते हुए पुलिस ने सुबोध पाठक और उनके बेटे राहुल पाठक पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्हें बाद में हिरासत में लेकर पूछताछ की गई.
लगातार पूछताछ के दौरान दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उन्होंने बताया कि लड़की की हत्या उनके घर में ही की गई थी और बाद में उसके शव को किराए की एम्बुलेंस से गया ले जाया गया, जहां सबूत मिटाने के लिए उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया.
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने हत्या का मकसद लोक-लाज का डर बताया है.
उनके बयान के अनुसार, लड़की का राहुल पाठक के बहनोई से इंस्टाग्राम के जरिए संपर्क हुआ था, जो बाद में घनिष्ठ संबंध में बदल गया. इससे क्रोधित होकर पिता और पुत्र ने कथित तौर पर साजिश रचकर उसकी हत्या कर दी.
पुलिस ने शव ले जाने के लिए इस्तेमाल की गई एम्बुलेंस को जब्त कर लिया है. चालक पहचान पिंटू कुमार सिंह ने जांचकर्ताओं को बताया कि सुबोध पाठक ने दावा किया था कि उसकी 13 वर्षीय बेटी की मृत्यु हो गई है और उसने अंतिम संस्कार के लिए गया ले जाने के लिए वाहन किराए पर लिया था.
अधिकारियों ने आरोपियों से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं, जिनकी आगे की जांच के लिए छानबीन की जा रही है.
रातू पुलिस स्टेशन के प्रभारी आदिकांत महतो, सब-इंस्पेक्टर महेश प्रसाद कुशवाहा, संतोष यादव और अनुरंजन कुमार ने इस मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. पुलिस ने बताया कि अतिरिक्त सबूत जुटाने और घटनाक्रम का पूरा पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है.
(आईएएनएस)

