
उदित वाणी जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित ऐतिहासिक गोपाल मैदान एक बार फिर एक भव्य आयोजन का गवाह बनने जा रहा है. वर्ष 1992 के बाद, आगामी 17, 18 और 19 मई को शहर में विशाल स्तर पर ‘राजस्थान महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा. मारवाड़ी समाज द्वारा आयोजित इस त्रि-दिवसीय उत्सव को इस बार पहले के मुकाबले कहीं अधिक वृहद और आकर्षक रूप दिया जा रहा है.
गोपाल मैदान में बनेगा ‘मिनी जैसलमेर’
इस महोत्सव का सबसे अनूठा आकर्षण ‘मिनी जैसलमेर’ होगा. आयोजन समिति मैदान के एक बड़े हिस्से को राजस्थान के जैसलमेर की तर्ज पर विकसित कर रही है. यहाँ विशेष रूप से रेतीले टीले (बालू) और ऊंटों की व्यवस्था की जाएगी, जिससे जमशेदपुर के लोगों को अपनी धरती पर ही राजस्थान की रेगिस्तानी संस्कृति और धोरों का वास्तविक अनुभव मिल सकेगा.
तीन दिन, तीन विशेष प्रस्तुतियां
महोत्सव के तीनों दिन राजस्थान के नामचीन कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा बिखेरी जाएगी:
• 17 मई: प्रसिद्ध लोक गायक संजय मुकुंदगढ़ अपनी सुरीली प्रस्तुति से कार्यक्रम का आगाज करेंगे. संजय मुकुंदगढ़ राजस्थान के एक प्रसिद्ध लोक गायक और पेशावर डॉक्टर हैं, जो अपनी मधुर आवाज और राजस्थानी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं. वे विशेष रूप से शेखावाटी क्षेत्र के लोक गीतों, भजनों और ‘धमाल’ के लिए लोकप्रिय हैं.
• 18 मई: मशहूर थिएटर ग्रुप ‘टर्बन टेल्स’ द्वारा हास्य-व्यंग्य नाटक “शेक्सपियर म्हारो जमाई” (Shakespeare Mharo Jamai) का लाइव मंचन होगा. शेक्सपियर म्हारो जमाई एक बंजारा लोक संगीत नाटक है जो राजस्थान की लोककथाओं और शेक्सपियर के तत्वों को मिश्रित करता है.इसका निर्देशन धूमिक चौहान ने किया है. • 19 मई: ‘राजस्थान की लता मंगेशकर’ और ‘ मरु कोकिला’ (Desert Nightingale) के नाम से विख्यात सीमा मिश्रा अपनी मधुर आवाज से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी.
वीआईपी अतिथियों का लगेगा जमावड़ा
आयोजन को भव्य बनाने के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ झारखंड के मुख्यमंत्री और टाटा स्टील के शीर्ष अधिकारियों को भी आमंत्रित किया जा रहा है. इसके अलावा, मारवाड़ी सम्मेलन के राष्ट्रीय पदाधिकारी और कई राजनीतिक हस्तियां भी इस गौरवशाली उत्सव का हिस्सा बनेंगी.
विशेष स्मारिका का प्रकाशन
इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए एक विशेष स्मारिका भी प्रकाशित की जाएगी. हरि मित्तल के मार्गदर्शन में तैयार हो रही इस स्मारिका के मुख्य संपादक मामराज अग्रवाल और बसंत जमशेदपुरी हैं. यह स्मारिका राजस्थान की शौर्य गाथा और विरासत को समर्पित होगी.

