उदित वाणी जमशेदपुर: राज्य में बिजली की दरों में की गई भारी बढ़ोतरी के खिलाफ अब आम जनता और राजनीतिक दलों का धैर्य जवाब देने लगा है. बढ़ी हुई दरों के विरोध में गुरुवार को जमशेदपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे. प्रदर्शनकारियों ने विद्युत महाप्रबंधक (GM) कार्यालय का घेराव किया और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
आम आदमी और किसानों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
बिजली शुल्क में इस अचानक वृद्धि का सीधा असर न केवल घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ा है, बल्कि छोटे व्यापारियों, उद्योग जगत और कृषि क्षेत्र को भी इसने बुरी तरह प्रभावित किया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में बिजली बिल का अतिरिक्त बोझ उठाना आम आदमी के लिए नामुमकिन है. किसानों ने भी चिंता जताई है कि सिंचाई के लिए बिजली की बढ़ी दरों से उनकी खेती की लागत बढ़ गई है, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया है.
भाजपा की चेतावनी: वापस लें बढ़ी दरें वरना होगा व्यापक आंदोलन
जीएम कार्यालय के घेराव के दौरान भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह विरोध प्रदर्शन महज एक शुरुआत है. यदि राज्य सरकार ने जल्द ही बिजली दरों में वृद्धि को वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा. भाजपा ने इस स्थिति के लिए पूरी तरह राज्य सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है.
प्रमुख मांगें: स्मार्ट मीटर की वसूली और कटौती पर रोक
प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:
बढ़ी हुई बिजली दरों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए.
उपभोक्ताओं को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.
खराब और जले हुए ट्रांसफार्मरों को प्राथमिकता के आधार पर बदला जाए.
मरम्मत के नाम पर अघोषित बिजली कटौती पर रोक लगे.
पोस्टपेड स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं से हो रही कथित मनमानी वसूली को बंद किया जाए.
राज्य में गहराते इस बिजली संकट और सियासी माहौल को देखते हुए आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं.


