उदित वाणी, पटना : बिहार श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग द्वारा बाल श्रम के खिलाफ गुरुवार को विमुक्ति अभियान चलाया जा रहा है. इसी क्रम में पूरे राज्य में पिछले दो दिनों में कुल 68 जगहों पर छापेमारी की गई, जिसमें से 34 बाल श्रमिक विमुक्त कराए गए और 15 प्राथमिकी दर्ज की गई.
विभाग के निर्देश पर गोपालगंज, बेगूसराय, औरंगाबाद, सिवान, गयाजी के साथ बेतिया जिले में बाल श्रम के खिलाफ सघन अभियान चलाया गया. श्रम अधीक्षक बेतिया विजय कुमार ठाकुर के नेतृत्व में चनपटिया प्रखंड के विभिन्न दुकानों एवं प्रतिष्ठानों में धावा दल की टीम ने जांच अभियान चलाकर दो बाल श्रमिकों को मुक्त कराया.
जानकारी के मुताबिक, धावा दलों ने गोपालपुर थाना क्षेत्र के लौकरिया चौक स्थित एक दुकान से दो बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया. इसके बाद दोनों बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां निर्देशानुसार उन्हें बाल गृह में रखा गया है. इस मामले में बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
विभाग की ओर से 20 और 21 मई को विशेष अभियान चलाते हुए कुल 68 स्थानों पर छापेमारी की गई. इस दौरान 34 बाल एवं किशोर श्रमिकों को मुक्त कराया गया तथा 15 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई. अभियान का नेतृत्व श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी लौकेश कुमार झा ने किया.
श्रम अधीक्षक विजय कुमार ठाकुर ने बताया कि किसी भी दुकान या प्रतिष्ठान में बाल श्रमिकों से काम कराना कानूनन अपराध है. इसके तहत दोषी नियोजकों पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक जुर्माना तथा दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान है.
इस अभियान में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी विभेश कुमार सिंह, भीम कुमार, प्रयास संस्था के कन्हैया कुमार, चाइल्ड लाइन, ग्राम नियोजन केंद्र तथा गोपालपुर थाना की टीम भी शामिल रही. श्रम विभाग ने स्पष्ट किया कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और बाल श्रमिक रखने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
(आईएएनएस)


