
उदित वाणी, जमशेदपुर : मां दुर्गा की उपासना का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माने जाने वाले नवपत्रिका स्नान के साथ रविवार की सुबह जमशेदपुर में दुर्गा पूजा की सप्तमी धूमधाम से शुरू हो गई. सूर्योदय से पहले ही शहर के विभिन्न पूजा पंडालों में परंपरागत अनुष्ठान पूरे विधि-विधान से संपन्न किए गए.
नवपत्रिका, जिसे स्थानीय लोग कोलाबोऊ भी कहते हैं, नौ तरह के पवित्र पौधों और पेड़ों की पत्तियों व टहनियों से तैयार की जाती है. इसमें केला, अरबी, हल्दी, धान, बेल, दालिम, अशोक, मान और दारिम के पौधे शामिल होते हैं. इन सभी को केले के पेड़ के साथ बांधकर देवी का प्रतीकात्मक रूप माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, यह प्रकृति, कृषि और उर्वरता से मां दुर्गा के गहरे संबंध का प्रतीक है.
सप्तमी की सुबह इस नवपत्रिका को पवित्र गंगाजल अथवा पास के किसी जलाशय में स्नान कराया गया. इसके बाद पूरे सम्मान और भक्ति भाव से इसे पूजा पंडालों में लाकर मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ स्थापित किया गया. इसी कारण इसे कोलाबोऊ पूजा भी कहा जाता है.
पूरे शहर में सुबह से ही ढाक की ताल, शंखध्वनि और उलूध्वनि गूंजने लगी. श्रद्धालुओं ने इस अनुष्ठान को दुर्गा पूजा की वास्तविक शुरुआत बताया. उनका मानना है कि नवपत्रिका स्नान के साथ ही मां दुर्गा का स्वागत होता है और उत्सव का असली रंग चढ़ने लगता है.
जमशेदपुर के गली-मोहल्लों से लेकर बड़े पूजा पंडालों तक भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने पारंपरिक परिधानों में शामिल होकर सप्तमी के उत्सव का आनंद लिया. शहर के सांस्कृतिक मंचों पर भी विशेष कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई है.
नवपत्रिका स्नान के साथ ही जमशेदपुर में मां दुर्गा की महापूजा का उत्सव चरम पर पहुंच गया है. अगले चार दिनों तक शहर भक्ति और आस्था में डूबा रहेगा.

