
मामले में एनोस एक्का को 1 लाख व उनकी पत्नी मेनन एक्का को 1.5 लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया
उदित वाणी, रांची : सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर बड़े पैमाने पर आदिवासी जमीन खरीदने के 15 साल पुराने मामले में रांची स्थित सीबीआई की बिशेष अदालत ने पूर्व मंत्री एनोस एक्का व उनकी पत्नी मेनन एक्का को 7-7 साल की सजा सुनायी. वहीं मामले में एनोस एक्का को 1 लाख रुपये और उनकी पत्नी मेनन एक्का को 1.5 लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया गया है तथा जुर्माने की राशि नहीं देने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है.
अदालत ने एनोस एक्का को धारा-193बी के तहत 7 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है. एक्का दंपत्ति के अलावा अन्य चार आरोपियों रांची के तत्कालीन एलआरडीसी कार्तिक कुमार प्रभात, ब्रजेश्वर महतो, अनिल कुमार व फिरोज अख्तर को 5-5 साल की सजा और 1-1 लाख रुपये का जुर्माने की सजा सुनायी गई है. वहीं मनीलाल महतो को 5 साल की सजा व 1.10 लाख रूपये की जुर्माना की सजा दी गई है.
जबकि अन्य आरोपियों राजस्व कर्मचारी ब्रजेश मिश्रा व राजकिशोर सिंह को 4-4 साल की सजा और 1-1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी गई. ज्ञात हो कि बिशेष न्यायाधीश एस एन तिवारी की अदालत द्वारा 29 अगस्त को ही उक्त सीएनटी एक्ट के उल्लंघन से जुड़े आरोपों के तहत उक्त 9 लोगों को दोषी करार दिया गया था. आरोपों के मुताबिक मंत्री रहते हुए एनोस एक्का ने पद का दुरुपयोग किया और फर्जी पते का इस्तेमाल कर आदिवासी भूमि की अवैध ढंग से खरीद-फरोख्त की. इसमें तत्कालीन एलआरडीसी कार्तिक कुमार प्रभात ने उनकी मदद की थी.
सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर जमीन की खरीदारी की गई. मामले में सीबीआई को जांच के दौरान पता चला कि एनोस एक्का की पत्नी मेनन एक्का के नाम पर हिनू में 22 कट्ठा, ओरमांझी में 12 एकड़, नेवरी में 4 एकड़ और चुटिया के सिरम टोली मौजा में 9 डिसमिल जमीन अवैध ढंग से खरीदी गई. उक्त जमीनें मार्च 2006 से मई 2008 के बीच खरीदी गई थी. सीबीआई द्वारा पेश किए गए सभी आरोपों को अदालत में साबित किये जाने के बाद कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराया.
हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने इस मामले में 4 अगस्त 2010 को ही एनोस एक्का समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. सीबीआई ने जांच पूरी करते हुए दिसंबर 2012 में चार्जशीट दाखिल की थी. जिस पर कोर्ट ने संज्ञान लिया था. मामले में एनोस एक्का समेत अन्य पर 5 नवंबर 2019 को आरोप तय किया गया था. इसके बाद सीबीआई ने सबूत पेश किया था.
