
उदित वाणी, जमशेदपुर: अपने तकनीकी नवाचारों और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने को लेकर राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) जमशेदपुर में चल रही प्रदर्शनी का समापन 28 अप्रैल शुक्रवार को होगा.
वन वीक, एक लैब अभियान के तहत हो रहे इस आयोजन के चौथे दिन प्रयोगशाला में टेक्नोप्रेन्योरशिप मीट और शिल्पकार मेला (कारीगर मीट) का आयोजन किया गया. एनएमएल के निदेशक डॉ. अवनीश कुमार श्रीवास्तव ने गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया और टेक्नोप्रेन्योरशिप मीट के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि यह मीट उद्यमियों, स्टार्ट अप और उद्योग को एक मंच प्रदान करता है, जहां वे एक दूसरे के अनुभव और बेस्ट प्रैक्टिसेस को शेयर कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि यह पहल आत्मनिर्भरता की दिशा में मेक इन इंडिया के उद्देश्यों को पूरा करने में उद्योग, स्टार्ट-अप और अनुसंधान के बीच हाथ मिलाने में मदद करेगा. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजेश कुमार पाठक, सचिव, टीडीबी ने कहा कि आज अनुसंधान को प्रौद्योगिकी में परिवर्तित करने और बौद्धिक संपदा (आईपी) से आर्थिक लाभ प्राप्त करने की आवश्यकता है.
उन्होंने उल्लेख किया कि स्टार्टअप राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि आज के स्टार्ट-अप कल के औद्योगिक दिग्गज हैं. उन्होंने बताया कि टीडीबी एक मंच पर एमएसएमई, स्टार्ट-अप और अन्य हितधारकों को एक साथ लाने के लिए एक माध्यम के रूप में कार्य करता है.
हाई स्ट्रेन्थ स्टील बनाने पर देना होगा जोर-उज्ज्वल चक्रवर्ती
कार्यशाला के दूसरे भाग में एक पैनल चर्चा हुई, जिसमें शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और एमएसएमई के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. जेसीपीएसीएल के प्रबंध निदेशक और सीआईआई झारखंड चैप्टर के अध्यक्ष उज्ज्वल चक्रवर्ती ने दर्शकों को जमशेदपुर इतिहास के बारे में जानकारी दी और बताया कि देश का पहला इस्पात संयंत्र कैसे स्थापित किया गया.
उन्होंने ऑटोमोबाइल, बुनियादी ढांचे के विकास जैसे सभी क्षेत्रों में इस्पात के महत्व पर जोर दिया और स्वदेशी तकनीकों को विकसित करने की आवश्यकता बताई. चक्रवर्ती ने कहा कि सीएसआईआर-एनएमएल, उद्योग के सहयोग से धातु विज्ञान में समर्पित अनुसंधान करने वाले पहले अनुसंधान संगठनों में से एक है.
उन्होंने इस्पात उद्योग के सामने आने वाली चुनौतियों और उसके अनुप्रयोग के लिए उच्च शक्ति वाले स्टील के विकास, जंग की रोकथाम, अयस्कों के लाभकारीकरण, प्रक्रिया नवाचार और उद्यमिता के लिए पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर जोर दिया.
देश के आर्थिक विकास में कारीगरों की अहम भूमिका-डॉ.शर्मा
धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र मुरादाबाद के महाप्रबंधक डॉ रवींद्र शर्मा ने देश के आर्थिक विकास के लिए कारीगरों के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने एमएचएससी के कार्यों और सुविधाओं और कारीगरों के कौशल उन्नयन के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता वाले उत्पाद का उचित मूल्य और उत्पादन सुनिश्चित करके कारीगरों के उत्थान के लिए कैसे प्रयास किया, इस पर विस्तार से बताया.
शर्मा ने अनुसंधान और विकास में सीएसआईआर-एनएमएल के साथ निरंतर जुड़ाव की भी बात की. डॉ. स्मिता पुथुचेरी, परियोजना सह-समन्वयक, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने बताया कि टीडीबी का उद्देश्य उद्यमियों, स्टार्ट-अप और उद्योगों को बाजार की पहुंच हासिल करने के लिए वित्तीय और प्रबंधन सहायता देकर मदद करना है.
बंगाल, ओडिशा और झारखंड के शिल्पकारों को मिला मंच
इस अवसर पर एक एक शिल्पकार मेला (कारीगरों की बैठक) का भी आयोजन किया गया, जिसमें पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और झारखंड के पीतल के कारीगरों के लिए शोधकर्ताओं के साथ बातचीत करने पर बल दिया गया.
मेला में उनके उत्पादों को प्रदर्शित किया गया था. शिल्पकार मेला के एक भाग के रूप में पीतल के कारीगरों के साथ एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया.
डॉ. रवींद्र कुमार शर्मा, जिन्हें धातु परिष्करण के क्षेत्र में अत्यधिक अनुभव है और भारत सरकार के तहत धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र के महाप्रबंधक के रूप में काम कर रहे हैं, ने से दूरस्थ क्षेत्रों में कारीगरों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को साझा किया और बैठक में उपस्थित सभी लोगों की मदद की.
डॉ. केएल साहू, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-एनएमएल ने कारीगरों को मौजूदा निर्यात दर में सुधार के लिए अपने उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार करने के बारे में व्यावहारिक सुझाव दिए. डॉ. एके. मोहंती ने पीतल की कलाकृतियों के लिए लाख के विकास पर जोर दिया. पांचवें दिन 28 अप्रैल को कॉलेज के छात्रों के लिए एक अकादमिक बैठक रखी गई है.
सीआईआई वायआई के प्रतिनिधियों ने एनएमएल की तकनीक के बारे में जाना
उद्योग के प्रतिनिधियों के रूप में सीआईआई वायआई जमशेदपुर और ईएनआई टीम ने एनएमएल का दौरा किया. टीम ने एनएमएल और सीएसआईआर द्वारा विकसित तकनीक को देखा और उसके बारे में जाना.
उन्होंने जिंकोमीटर, फ्लॉगार्ड, पाइप टेस्टिंग, जियोपॉलिमर ब्रिक्स, लिथियम आयन बैटरी रिसाइक्लिंग, पिकलिंग वेस्ट से रेड ऑक्साइड एक्सट्रैक्शन आदि जैसी तकनीक के बारे में जाना. यंग इंडियंस के पदाधिकारियों ने वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट अनुसंधान एवं विकास की सराहना की. उन्होंने उम्मीद की कि इन तकनीक को पारस्परिक लाभ के लिए लागू किया जा सकता है.


