
यूनियन की नई टीम ने जीत के बाद कहा था- जल्द कराएंगे बेहतर ग्रेड
उदित वाणी, जमशेदपुर: टाटा कमिंस कर्मचारी यूनियन के चुनाव के चार माह गुजरने के बाद भी ग्रेड समझौता नहीं हो पाया है. काफी मशक्कत के बाद जून माह में यूनियन की नई टीम आने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि एक माह के अंदर ग्रेड समझौता हो जाएगा.
ग्रेड को लेकर यूनियन की ओर से प्रबंधन को चार्टर्ड ऑफ डिमांड भी सौंपा गया था. इसके पहले नई यूनियन ने सारे कर्मचारियों से ग्रेड को लेकर रायशुमारी भी की थी और उसे समेकित कर चार्टर्ड ऑफ डिमांड का हिस्सा बनाया था.
इसमें ग्रेड की अवधि को तीन साल से कम करने से लेकर कर्मचारी पुत्रों के नियोजन जैसे मुद्दे प्रमुख थे. यही नहीं चुनाव जीतने के बाद नये अध्यक्ष दिप्तेन्दू चक्रवर्ती ने भी कहा था कि उनकी पहली प्राथमिकता कर्मचारियों को बेहतर ग्रेड कराने की होगी.
ग्रेड में देरी होती गई
पहले सारे कर्मचारियों को लग रहा था कि नई यूनियन के आने के बाद प्रबंधन जल्द ग्रेड समझौता कर देगा. इस साल टाटा मोटर्स में भी समय पर ग्रेड समझौता होने से उम्मीद जगी कि टाटा कमिंस में जल्द ही ग्रेड हो जाएगा, लेकिन ग्रेड की गाड़ी लेट होती गई.
अमूमन टाटा मोटर्स के समझौते के बाद टाटा कमिंस का समझौता भी हो जाता है. पहले माना जा रहा था कि बोनस के पहले ग्रेड समझौता होगा, लेकिन बोनस समझौता होने के बाद भी ग्रेड को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं है और प्रबंधन एवं यूनियन के बीच कोई वार्ता नहीं हो पा रही है.
ग्रेड की अवधि चार साल करने की चर्चा
सूत्रों का कहना है कि टाटा मोटर्स की तर्ज पर टाटा कमिंस में भी ग्रेड की अवधि को चार साल किए जाने पर विचार चल रहा है. वैसे नई यूनियन ने अपने चार्टर्ड ऑफ डिमांड में ग्रेड की अवधि को तीन साल की बजाय दो साल करने की बात कही है, लेकिन सब मान रहे हैं कि ग्रेड की अवधि कम होने का तो कोई चांस ही नहीं है.
यूनियन की नई टीम के सामने बेहतर ग्रेड कराने की चुनौती भी है. उल्लेखनीय है कि टाटा कमिंस का ग्रेड एक अप्रैल 2022 से लंबित है.

