उदित वाणी, कोलकाता : कोलकाता में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत एक विशेष अदालत ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस को, जो पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार में मंत्री थे, 21 मई तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेज दिया.
उन्हें सोमवार रात को प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल में पिछली सरकार के दौरान हुए करोड़ों रुपए के ‘नगरपालिका नौकरियों के बदले कैश’ मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया. यह गिरफ्तारी कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में स्थित प्रवर्तन निदेशालय के सॉल्ट लेक दफ्तर में 10 घंटे से ज्यादा की पूछताछ के बाद हुई.
मंगलवार दोपहर को, जांच अधिकारियों ने उन्हें कोलकाता में विशेष ‘मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम’ (पीएमएलए) अदालत के सामने पेश किया.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, जज ने बोस को 21 मई तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया.
बोस के वकील ने अपने मुवक्किल की ओर से जमानत याचिका दायर की और दलील दी कि जिन दस्तावेजों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने उनके मुवक्किल को गिरफ्तार किया है, वे 2022 और 2023 के बीच ही जांच अधिकारियों के पास मौजूद थे. ऐसे में यह सवाल उठता है कि तीन-चार साल पहले सामने आए दस्तावेजों के आधार पर 2026 में बोस को कैसे गिरफ्तार किया जा सकता है.
हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय के वकील ने जमानत याचिका का विरोध किया. उन्होंने आशंका जताई कि बोस एक प्रभावशाली राजनेता हैं, इसलिए उन्हें जमानत देने से इस मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ होने और गवाहों को प्रभावित करने का खतरा हो सकता है.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, विशेष पीएमएलए अदालत के जज ने प्रवर्तन निदेशालय के वकील की दलीलों को स्वीकार कर लिया और बोस को 21 मई तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया.
बोस, जो उत्तरी 24 परगना जिले की बिधाननगर विधानसभा सीट से तीन बार तृणमूल कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं, इस बार चुनाव हार गए थे.
प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को करोड़ों रुपए के ‘नगरपालिका नौकरियों के बदले कैश’ मामले के बारे में पहली जानकारी तब मिली थी, जब वे पश्चिम बंगाल में ‘स्कूल नौकरियों के बदले कैश’ घोटाले से जुड़े एक अन्य मनी लॉन्ड्रिंग मामले के सिलसिले में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े प्रमोटर अयान शील के घर पर छापेमारी और तलाशी अभियान चला रहे थे.
बाद में, कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी ‘नगरपालिका नौकरियों के बदले कैश’ मामले में समानांतर जांच शुरू कर दी.
जैसे-जैसे इन दोनों केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों ने जांच को आगे बढ़ाया, राज्य के मंत्रियों और सत्ताधारी दल के नेताओं सहित कई राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए.
(आईएएनएस)


