उदित वाणी जमशेदपुर : बागबेड़ा थाना अंतर्गत स्थित नागाडीह में नौ साल पहले हुए चर्चित चार लोगों की हत्या मामले में एक बार फिर न्यायिक हलचल तेज हो गई है। साक्ष्य के अभाव में बरी किए गए 23 आरोपियों के खिलाफ राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस कदम के बाद अब उन आरोपियों पर दोबारा कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है, जिन्हें पहले राहत मिल चुकी थी।
23 आरोपियों के खिलाफ दोबारा शुरू होगी कानूनी प्रक्रिया
जानकारी के मुताबिक, कुल 28 आरोपियों में से 23 को ट्रायल कोर्ट ने सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया था। हालांकि, इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है। अब सरकार की अपील के बाद शेष आरोपियों के खिलाफ केस फिर से खुलने की संभावना बढ़ गई है। इस घटनाक्रम से पीड़ित परिवार में एक बार फिर न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
पीड़ित परिवार को न्याय की आस
पीड़ित पक्ष के उत्तम वर्मा का कहना है कि पर्याप्त गवाही और साक्ष्य होने के बावजूद आरोपियों का बरी होना न्याय के साथ अन्याय था। उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर मामले की पुनः सुनवाई की मांग भी की थी। अब सरकार की पहल से उन्हें भरोसा है कि सच सामने आएगा।
दोषियों की वर्तमान स्थिति और सजा
गौरतलब है कि इस मामले में 8 अक्तूबर 2025 को पांच आरोपियों—राजाराम हांसदा, रेंगो पूर्ति, गोपाल हांसदा, सुनील सरदार और तारा मंडल—को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। लेकिन बाद में इनमें से चार दोषियों की जमानत हाईकोर्ट से मंजूर हो गई, जिससे वे जेल से बाहर आ चुके हैं। केवल एक सजायाफ्ता अब भी जेल में बंद है। इसी बीच, आठ साल बाद अदालत में सरेंडर करने वाले आरोपी डॉक्टर मार्डी को भी हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है, जिससे मामले ने और जटिल रूप ले लिया है।
यह पूरा मामला 18 मई 2017 का है, जब बच्चा चोरी की अफवाह के बाद उग्र भीड़ ने चार निर्दोष लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस दर्दनाक घटना में जुगसलाई नयाबाजार के विकास वर्मा, गौतम वर्मा और गंगेश की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उनकी दादी रामसखी देवी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। अब, सरकार की नई पहल और न्यायिक प्रक्रिया के दोबारा शुरू होने से यह मामला फिर सुर्खियों में है और सबकी नजरें हाईकोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं।


