
उदित वाणी, जमशेदपुर : बागबेड़ा थाना अंतर्गत किताडीह स्थित ग्वालापट्टी क्षेत्र में रेलवे प्रशासन की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई सोमवार को उस वक्त हिंसक झड़प में बदल गई थी, जब जमीन विवाद को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध उग्र हो गया. मौके पर मौजूद अधिकारियों के साथ गाली-गलौज और मारपीट की घटना ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है.
सरकारी कार्रवाई के दौरान भड़का विवाद
रेलवे के संपदा पदाधिकारी (चक्रधरपुर मंडल) द्वारा पारित आदेश (मामला संख्या EC/EO/344/2025) के अनुपालन में टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची थी. अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर दंडाधिकारी की मौजूदगी भी सुनिश्चित की गई थी.
हालांकि, जैसे ही टीम ने कार्रवाई शुरू की, स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई और विरोध शुरू हो गया, जो देखते ही देखते झड़प में बदल गया.

अधिकारी से मारपीट के आरोप में तीन नामजद
कार्रवाई में शामिल एक अधिकारी ने अपने बयान में कहा कि “जितेंद्र यादव, राजकमल यादव और सहेन्द्र यादव भीड़ के साथ पहुंचे और बहस के दौरान गाली-गलौज करते हुए धक्का-मुक्की और मारपीट की, जिससे मुझे चोटें आईं.”
संयुक्त जांच प्रतिवेदन (कार्यवृत्त) में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि हाथापाई की शुरुआत कथित तौर पर भीड़ की ओर से हुई.
एक आरोपी पर पूर्व में सीसीए लगने की चर्चा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, नामजद आरोपियों में शामिल जितेंद्र यादव पर करीब दो वर्ष पूर्व क्राइम कंट्रोल एक्ट (सीसीए) के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आ रही है. हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक दस्तावेजों की पुष्टि की प्रक्रिया जारी है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि
“आरोपियों के आपराधिक इतिहास की विस्तृत जांच की जा रही है. यदि पूर्व में सीसीए या अन्य गंभीर मामलों की पुष्टि होती है, तो वर्तमान मामले में भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी.”
जमीन को लेकर दो पक्ष आमने-सामने
स्थानीय लोगों का दावा है कि विवादित जमीन सहेन्द्र यादव की पत्नी शांति देवी के नाम है, जबकि रेलवे प्रशासन इसे अपनी संपत्ति बताते हुए अतिक्रमण करार दे रहा है.
नोटिस में मेघा यादव का नाम दर्ज होने पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इस नाम से वहां कोई मकान नहीं है.
स्थानीयों का आरोप: ‘बिना जांच के कि जा रही कार्रवाई’
घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई. उनका कहना है कि प्रशासन बिना समुचित जांच के कार्रवाई कर रहा है. स्टेबाइट लोगों का कहेंगे कि पहले जमीन का सही मालिकाना हक स्पष्ट किया जाए, फिर कार्रवाई हो. अचानक बुलडोजर और पुलिस लेकर पहुंचना सही नहीं है.”
प्रशासन सख्त, इलाके में बढ़ी सुरक्षा
प्रशासन ने घटना को गंभीरता से लेते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है. अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्य में बाधा और हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कानूनी प्रक्रिया से बाहर जाकर विरोध करना गलत है. दोषियों पर सख्त कार्रवाई तय है.
जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
किताडीह का यह विवाद अब केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया, जमीन स्वामित्व और कानून-व्यवस्था से जुड़ा संवेदनशील मामला बन चुका है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन किस दिशा में कार्रवाई करता है.

