
उदित वाणी रांची: झारखंड में चर्चित सेवायत भूमि अनियमितता मामले में पिछले करीब 11 महीनों से जेल में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को बड़ा झटका लगा है. झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिससे फिलहाल उनकी रिहाई की उम्मीदों को विराम लग गया है.
पिछले गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा था. यह मामला एसीबी द्वारा दर्ज मामले से से जुड़ा है. आरोप है कि हजारीबाग में उपायुक्त (डीसी) के पद पर रहते हुए विनय चौबे ने सेवायत भूमि की अवैध खरीद-बिक्री में भूमिका निभाई.
जांच एजेंसी का दावा है कि इस प्रकरण में नियमों की अनदेखी कर जमीन के हस्तांतरण में अनियमितताएं की गईं, जिससे सरकारी प्रावधानों का उल्लंघन हुआ. हाईकोर्ट में जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की बेंच में इस याचिका पर विस्तृत सुनवाई हुई. एसीबी की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुमित गड़ोदिया ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि मामला गंभीर प्रकृति का है और इसमें कई प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता सामने आई है, इसलिए इस स्तर पर जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है.
वहीं, विनय चौबे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस मजूमदार ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि उनके मुवक्किल लंबे समय से जेल में हैं और जांच में सहयोग कर रहे हैं, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए. हालांकि अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया.
इस मामले में विनय चौबे के अलावा उनके करीबी सहयोगी विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) शैलेश कुमार और ब्रोकर विजय सिंह समेत कुल 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है. एसीबी इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रही है और जमीन से जुड़े दस्तावेजों एवं लेन-देन की पड़ताल जारी है.

