
उदित वाणी, जमशेदपुर: टाटानगर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के अनियमित परिचालन और घंटों की देरी ने यात्रियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। चाईबासा-चांडिल रेलखंड पर ट्रेनों की लेटलतीफी इस कदर बढ़ गई है कि आधे घंटे का सफर अब 4 से 5 घंटे में तय हो रहा है। इस अव्यवस्था के खिलाफ अब राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश सुलगने लगा है।
मालगाड़ियों को प्राथमिकता, यात्री ट्रेनों की अनदेखी
स्थानीय विधायक सरयू राय ने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे राजस्व के लालच में मालगाड़ियों को रास्ता देने के लिए यात्री ट्रेनों को घंटों आउटर पर खड़ा रख रहा है। सरयू राय के अनुसार, यह आम जनता के मौलिक अधिकारों का हनन है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्लेटफॉर्म पर चलेगा ‘हस्ताक्षर अभियान’
रेलवे की इस मनमानी को बेनकाब करने के लिए विधायक सरयू राय ने एक विशेष पहल की है। उन्होंने घोषणा की है कि कल वे अपने समर्थकों के साथ टाटानगर स्टेशन के सभी प्लेटफॉर्म पर हस्ताक्षर अभियान चलाएंगे।
इस अभियान के दौरान यात्रियों से उनकी ट्रेन की देरी का लिखित डेटा जुटाया जाएगा।
यह डेटा रेलवे बोर्ड और उच्च अधिकारियों को सौंपकर व्यवस्था में सुधार की मांग की जाएगी।
(JDU) की उग्र आंदोलन की चेतावनी
ट्रेनों के समय पर न चलने को लेकर जेडीयू ने भी कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही ट्रेनों की समयसारिणी में सुधार नहीं हुआ, तो वे सड़क से लेकर रेल पटरियों तक उग्र आंदोलन करेंगे। विपक्षी दलों और स्थानीय नागरिकों का समर्थन मिलने से यह मुद्दा अब बड़ा जन-आंदोलन बनने की ओर अग्रसर है।
आंदोलन की राह पर यात्री
रेलवे प्रशासन की ओर से तकनीकी खराबी और रखरखाव के पुराने तर्क दिए जा रहे हैं, लेकिन यात्रियों का कहना है कि सुधार के आश्वासन केवल कागजों तक सीमित हैं। रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा और छात्रों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो रही है, जिससे आक्रोश चरम पर है।

