
उदित वाणी, रांची: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), झारखंड के अंतर्गत राज्य में परिवार नियोजन कार्यक्रम को नई गति दी जा रही है. सुरक्षित, प्रभावी और सुलभ अस्थायी गर्भनिरोधक सेवाओं को बढ़ावा देकर सरकार का उद्देश्य न केवल जनसंख्या स्थिरीकरण है, बल्कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाना भी है.
तीन प्रमुख अस्थायी विधियां और उनकी विशेषताएं
कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तीन मुख्य विधियों पर ध्यान केंद्रित किया है:
पी.पी.आई.यू.सी.डी. (PP-IUCD): यह विधि प्रसव के 48 घंटे के भीतर अपनाई जाती है. यह उन माताओं के लिए वरदान है जो बच्चों के बीच अंतर रखना चाहती हैं. इसमें लाभुक को ₹300 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है.
पी.ए.आई.यू.सी.डी. (PA-IUCD): गर्भपात (Abortion) के तुरंत बाद अपनाई जाने वाली यह विधि महिलाओं को अनियोजित गर्भधारण से सुरक्षा प्रदान करती है. इसमें भी लाभुक को ₹300 प्रोत्साहन राशि मिलती है.
आई.यू.सी.डी. (IUCD): यह एक दीर्घकालिक और प्रतिवर्ती (Reversible) विधि है जो 5 से 10 वर्षों तक प्रभावी रह सकती है. इसे कभी भी प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी द्वारा हटाया जा सकता है.
हर स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध हैं सेवाएं
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सुनिश्चित किया है कि ये सेवाएं राज्य के हर स्तर पर उपलब्ध हों. जिला अस्पतालों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) तक, प्रशिक्षित डॉक्टर और एएनएम परामर्श और सेवाएं प्रदान कर रहे हैं.
सहिया कार्यकर्ताओं की भूमिका और जागरूकता
समुदाय स्तर पर जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी ‘सहिया’ कार्यकर्ताओं को सौंपी गई है. वे घर-घर जाकर महिलाओं को इन विधियों के लाभ समझा रही हैं ताकि वे बिना किसी संकोच के सुरक्षित विकल्पों को चुन सकें.
परिवार नियोजन के मुख्य लाभ:
पूर्णतः सुरक्षित और दीर्घकालिक सुरक्षा.
स्वास्थ्य संस्थानों में आसान उपलब्धता.
आवश्यकता पड़ने पर विधि को हटाने की सुविधा (Reversible).
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में समग्र सुधार.
अपील: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड ने सभी योग्य दंपतियों से आह्वान किया है कि वे इन अस्थायी विधियों को अपनाकर एक स्वस्थ और सशक्त परिवार की नींव रखने में अपना सहयोग दें.

