
उदित वाणी, जमशेदपुर : भोजपुरी रंगमंच को समर्पित संस्था ‘रंगश्री’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय 9वाँ भोजपुरी नाट्य महोत्सव बिष्टुपुर स्थित तुलसी भवन में भव्य रूप से शुरू हुआ.
रंगश्री संस्था का गौरवशाली इतिहास
भोजपुरी रंगमंच को विश्व पटल पर पहचान दिलाने वाली संस्था ‘रंगश्री’ की स्थापना 1978 में बोकारो स्टील सिटी और 1994 में दिल्ली में हुई थी. अपनी स्थापना के समय से ही यह संस्था देश-विदेश में भोजपुरी नाटकों के माध्यम से लोक कला को समृद्ध करने और सामाजिक चेतना जागृत करने का कार्य कर रही है.

हास्य-व्यंग्य नाटक: ‘यमलोक में करप्शन’
महोत्सव के पहले दिन (18 अप्रैल 2026) का शुभारंभ श्री अरविंद विद्रोही द्वारा रचित नाटक “यमलोक में करप्शन” से हुआ. डॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह के निर्देशन में हुए इस मंचन ने दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ गंभीर मुद्दों पर सोचने पर मजबूर कर दिया. नाटक में टीवी विज्ञापनों से प्रेरित गलत खान-पान और ‘एक पर एक फ्री’ शराब योजनाओं पर तीखा प्रहार किया गया. साथ ही, आयुष्मान भारत योजना के तहत ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज की जानकारी भी दी गई.
‘माइंडसेट’: भाषा और संस्कृति पर चोट
दूसरी प्रस्तुति डॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह कृत नाटक ‘माइंडसेट’ की रही. इस नाटक ने हास्य के माध्यम से अंग्रेजी बोलने की मानसिकता को गुलामी का प्रतीक बताया. नाटक का मूल संदेश था कि “भाषा बचेगी तभी संस्कृति भी बचेगी.”
मंच पर कलाकारों का जीवंत अभिनय
नाटकों में कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों का मन मोह लिया:
डॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह: खदेरन की भूमिका.
श्री अखिलेश कुमार पाण्डेय: विद्रोही जी और सिंहासन (प्लांट कर्मचारी).
श्री सौमित्र वर्मा: यमराज और शिक्षक रामलखन (जबरदस्त अभिनय).
अन्य कलाकार: रुस्तम कुमार (चित्रगुप्त और नाकी), विजय यादव (यमदूत 1), संदीप कुमार (यमदूत 2), कृति कुमारी, विनय कांत (डॉक्टर, रसिक लाल की आत्मा और विद्रोही जी के बेटे) और प्रवीण (कर्मचारी).
नेपथ्य: संगीत पर कीर्ति यादव तथा मंच सज्जा में अशोक एवं प्रभात रंजन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
यह आयोजन संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार), सिंहभूम जिला भोजपुरी साहित्य परिषद और सिंहभूम जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के सहयोग से संपन्न हुआ.

