
उदित वाणी, जमशेदपुर : जिले में वित्तीय लेन-देन की प्रक्रियाओं को अधिक सटीक, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से उपायुक्त श्री अनन्य मित्तल ने जमशेदपुर कोषागार का विस्तृत निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने वित्तीय अभिलेखों की स्थिति, भुगतान प्रणाली तथा विभागीय समन्वय की समीक्षा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी वित्तीय कार्यों में उच्च स्तर की सावधानी और जवाबदेही अनिवार्य है.
WAMIS से होगा पिछले 5 वर्षों के आवंटन-निकासी का मिलान
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने विशेष रूप से यांत्रिकी विभागों (Engineering Departments) को कड़े निर्देश दिए. उन्होंने पिछले 5 वर्षों में प्राप्त आवंटन एवं की गई निकासी का विस्तृत मिलान WAMIS से करने का आदेश दिया. उपायुक्त ने कहा कि विभागवार सभी वित्तीय अभिलेखों का पुनः सत्यापन किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आवंटित राशि का उपयोग नियमानुसार हुआ है. किसी भी विसंगति पर त्वरित कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
10 दिनों के भीतर उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) जमा करने का अल्टीमेटम
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए उपायुक्त ने सभी यांत्रिकी विभागों को निर्देशित किया कि पूर्ण हो चुकी योजनाओं के उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificates) आगामी 10 दिनों के अंदर अनिवार्य रूप से समर्पित करें. इसमें किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDOs) को सतर्क रहने के निर्देश
उपायुक्त ने सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDOs) को पूर्व में की गई निकासी से संबंधित संपूर्ण प्रक्रियाओं की गहन जांच करने को कहा. उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक भुगतान के पीछे की स्वीकृति, अभिलेख एवं बैंक विवरणों का सावधानीपूर्वक मिलान किया जाए ताकि त्रुटि या अनियमितता की कोई गुंजाइश न रहे.
कोषागार की शुचिता और समयबद्ध कार्य निष्पादन पर जोर
निरीक्षण के अंत में उपायुक्त ने कहा कि कोषागार की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और शुचिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. उन्होंने कोषागार पदाधिकारी को सभी विपत्रों (Bills) की सूक्ष्म जांच करने और नियमों के अनुपालन में ढिलाई न बरतने का निर्देश दिया. साथ ही, लंबित मामलों के समयबद्ध निष्पादन के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया गया.

