
उदित वाणी बोकारो: एक तरफ देश की संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाने की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ झारखंड के बोकारो से एक छात्रा की बेबसी भरी पुकार सामने आई है. सेक्टर 4/जी की रहने वाली प्रिया कुमारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बोकारो डीसी विजया जाधव से हाथ जोड़कर अपनी पढ़ाई जारी रखने की गुहार लगाई है. प्रिया की मार्मिक अपील ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल पसीज दिया है.
हादसे ने छीनी पिता की सेहत और बेटी की शिक्षा
प्रिया कुमारी के परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब एक सड़क दुर्घटना में उसके पिता की कमर टूट गई. घर में कमाने वाले इकलौते सदस्य के बिस्तर पर पड़ जाने से परिवार की माली हालत बदतर हो गई. खाने के लाले पड़ गए, जिसका सीधा असर प्रिया की शिक्षा पर पड़ा. प्रिया सेक्टर 8/बी स्थित एक पब्लिक स्कूल में कक्षा 8 की छात्रा थी, लेकिन घर की आर्थिक तंगी के कारण वह स्कूल की फीस नहीं भर सकी.
स्कूल का कठोर रुख: परीक्षा से रोका, स्कूल से निकाला
प्रिया का आरोप है कि फीस न दे पाने के कारण स्कूल प्रबंधन का व्यवहार उसके प्रति बेहद कठोर रहा. उसने बताया कि स्कूल की प्रधानाचार्या ने न तो उसे कक्षा 8 की परीक्षा देने दी और न ही स्कूल में पढ़ने की अनुमति दी. प्रिया ने नम आंखों से बताया, “मैं सुबह स्कूल गई थी, लेकिन प्रिंसिपल ने मुझे खरी-खोटी सुनाकर वापस भेज दिया. मेरा सपना है कि मैं पढ़-लिखकर इंजीनियर बनूँ, लेकिन गरीबी मेरे सपनों के आड़े आ रही है.”
व्यवस्था पर सवाल: क्या गरीब की बेटी नहीं पढ़ पाएगी?
प्रिया की यह अपील झारखंड की शिक्षा व्यवस्था और निजी स्कूलों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है. एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ फीस के अभाव में एक होनहार छात्रा को स्कूल से निकाल दिया जाना विचलित करने वाला है. प्रिया ने मुख्यमंत्री से प्रार्थना की है कि उसे फिर से स्कूल जाने का अवसर मिले ताकि वह अपना भविष्य संवार सके.

