
उदित वाणी जमशेदपुर: पलाशबानी पंचायत में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. स्थानीय ग्रामीणों ने पंचायत समिति सदस्य भरत राम लोहरा पर फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने का गंभीर आरोप लगाया है. इस संबंध में ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है.
आरक्षित सीट और संदिग्ध प्रमाण-पत्र का विवाद
ग्रामीणों का दावा है कि वर्ष 2022 के पंचायत चुनाव में पलाशबानी सीट अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित थी. भरत राम लोहरा ने इसी श्रेणी से चुनाव जीता, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वह इस क्षेत्र के मूल खतियानधारी नहीं हैं. शिकायत के अनुसार, उनका जाति प्रमाण-पत्र संख्या JHCST/2022/194655, जो 4 मई 2022 को मानगो अंचल कार्यालय से निर्गत हुआ था, वह नियमों की कसौटी पर संदिग्ध है.
जाति की सत्यता पर उठे सवाल: ‘कमार’ या ‘लोहरा’?
ग्रामीणों ने साक्ष्यों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भरत राम लोहरा का परिवार मूल रूप से पश्चिम सिंहभूम जिले के मंझारी क्षेत्र (पिल्का गांव) का रहने वाला है. वहां के राजस्व रिकॉर्ड और खतियान में उनका परिवार ‘कमार’ जाति (EBC-1) के रूप में दर्ज है. झारखंड के नियमानुसार, ST प्रमाण-पत्र के लिए 1950 से पूर्व का निवास या 1964 का खतियान अनिवार्य है. ग्रामीणों का तर्क है कि जब मूल खतियान में जाति ‘कमार’ है, तो ST श्रेणी का लाभ लेना पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है.
आपराधिक रिकॉर्ड का भी उल्लेख
शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने केवल जाति ही नहीं, बल्कि भरत राम लोहरा के आचरण पर भी सवाल उठाए हैं. आरोप है कि उनके खिलाफ पूर्वी सिंहभूम न्यायालय में कई आपराधिक मामले लंबित हैं और वे अवैध गतिविधियों में भी संलिप्त रहे हैं. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि एक जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी योग्यताओं की निष्पक्ष जांच हो.
वर्तमान में इन आरोपों पर भरत राम लोहरा की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन इस विवाद ने पंचायत की राजनीति में हलचल मचा दी है.

