
उदित वाणी बोकारो: बोकारो पुलिस ने साइबर अपराध के विरुद्ध एक बड़ी सफलता हासिल की है. चास थाना क्षेत्र स्थित मालती लक्सजरिया सिटी के एक फ्लैट में छापेमारी कर पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस दौरान पुलिस ने जामताड़ा निवासी चार शातिर अपराधियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है, जो डिजिटल माध्यमों से लोगों की जमापूंजी पर हाथ साफ कर रहे थे.
गुप्त सूचना पर चास पुलिस की कार्रवाई
बोकारो पुलिस अधीक्षक (SP) को गुप्त सूचना मिली थी कि मालती लक्सजरिया सिटी के एन-ब्लॉक स्थित फ्लैट नंबर 101 में कुछ संदिग्ध युवक रह रहे हैं और वहां से साइबर अपराध का संचालन किया जा रहा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए चास थाना प्रभारी प्रकाश मंडल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें साइबर थाना के विशेषज्ञ भी शामिल थे. टीम ने अचानक फ्लैट पर दबिश दी, जिससे अपराधियों को भागने का मौका नहीं मिला.
ठगी का तरीका: फर्जी APK फाइल और स्क्रीन शेयरिंग
गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में ठगी के चौंकाने वाले तरीकों का खुलासा किया है. ये अपराधी खुद को बैंक अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे. KYC अपडेट करने, ATM ब्लॉक होने या सस्ता लोन दिलाने का झांसा देकर ये शिकार को एक फर्जी APK फाइल इंस्टॉल करने के लिए प्रेरित करते थे. एक बार फाइल इंस्टॉल होने के बाद, ये व्हाट्सएप कॉल और स्क्रीन शेयरिंग ऐप के जरिए पीड़ित के बैंक विवरण, पासवर्ड और OTP हासिल कर लेते थे और पलक झपकते ही खाता खाली कर देते थे.
जामताड़ा से बोकारो को बनाया नया ठिकाना
पकड़े गए सभी आरोपी मूल रूप से साइबर अपराध के लिए कुख्यात जामताड़ा जिले के रहने वाले हैं. पुलिस के अनुसार, ये आरोपी पिछले 3-4 महीनों से चास के इस आलीशान फ्लैट में किराए पर रहकर ठगी का काम कर रहे थे. उन्होंने अपनी पहचान छिपाने के लिए एक पॉश इलाके को चुना था ताकि किसी को उन पर शक न हो.
16 मोबाइल और लैपटॉप समेत कई उपकरण जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस ने फ्लैट से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं. बरामद सामानों में शामिल हैं:
16 मोबाइल फोन (विभिन्न कंपनियों के)
01 लैपटॉप
सैकड़ों मोबाइल नंबरों वाली डायरी (जिनका उपयोग ठगी के लिए किया जाता था)
मामला दर्ज, जांच जारी
इस मामले में पुलिस ने चास थाना कांड संख्या 36/26 के तहत साइबर अपराध और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है. पुलिस अब इस गिरोह के अन्य नेटवर्क और बैंक खातों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने लोगों से कितनी राशि की ठगी की गई है.

