
उदित वाणी , जमशेदपुर: लौहनगरी के निजी स्कूलों द्वारा हर साल री-एडमिशन (Re-admission) के नाम पर वसूले जा रहे भारी-भरकम शुल्क के खिलाफ विरोध की लहर तेज हो गई है। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के बैनर तले कार्यकर्ताओं और अभिभावकों ने गुरुवार को जमशेदपुर उपायुक्त (DC) कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने निजी स्कूलों की मनमानी और प्रशासन की चुप्पी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
अभिभावकों पर आर्थिक बोझ का आरोप
धरने को संबोधित करते हुए संगठन के नेताओं ने कहा कि शिक्षा का व्यवसायीकरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अवैध वसूली: प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शहर के अधिकांश निजी स्कूल हर शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में अभिभावकों से री-एडमिशन के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं। यह पूरी तरह से अवैध और शिक्षा के अधिकार के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
बढ़ता बोझ: महंगाई के इस दौर में हर साल हजारों रुपये का अतिरिक्त शुल्क चुकाना मध्यम और गरीब वर्गीय अभिभावकों के लिए आर्थिक रूप से कमर तोड़ने वाला साबित हो रहा है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि अगर प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा।
“हमारी मांग है कि री-एडमिशन शुल्क पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और जो स्कूल नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनकी मान्यता रद्द करने की दिशा में कार्रवाई की जाए।”
उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के समापन पर एक प्रतिनिधिमंडल ने जमशेदपुर उपायुक्त को एक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि स्कूलों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं ताकि कोई भी संस्थान विकास शुल्क या री-एडमिशन के नाम पर अभिभावकों का शोषण न कर सके। धरने में बड़ी संख्या में ऐसे अभिभावक भी शामिल हुए जिनके बच्चे शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

