
उदित वाणी, रांची/पोटका: पूर्वी सिंहभूम जिले में पत्थर उत्खनन (Stone Mining) के बाद बेतरतीब छोड़े गए गहरे गड्ढे अब जनसुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। इस गंभीर विषय को लेकर पोटका विधायक संजीव सरदार ने बुधवार को झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने ‘शून्य काल’ के माध्यम से इन जानलेवा गड्ढों के अविलंब समतलीकरण (Leveling) की मांग सरकार के समक्ष रखी।
हादसों को न्योता देते ‘खतरनाक गड्ढे’
सदन को संबोधित करते हुए विधायक संजीव सरदार ने कहा कि पोटका समेत जिले के कई क्षेत्रों में स्टोन माइनिंग के बाद लीजधारकों ने नियमों को ताक पर रखकर विशाल और गहरे गड्ढे खुले छोड़ दिए हैं।
बरसात में बढ़ता खतरा: उन्होंने विशेष रूप से चिंता जताई कि वर्षा ऋतु में इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे ये ‘डेथ ट्रैप’ (Death Trap) में तब्दील हो जाते हैं।
नियमों का उल्लंघन: विधायक ने स्पष्ट किया कि खनन नियमों के अनुसार, काम खत्म होने के बाद गड्ढों को भरना अनिवार्य है, लेकिन अधिकांश लीजधारकों ने अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है।
विधायक की प्रमुख मांगें:
त्वरित समतलीकरण: प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर इन गड्ढों को भरवाए ताकि भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
लीजधारकों पर कार्रवाई: नियमों की अनदेखी करने वाले खनन पट्टा धारकों (Lease Holders) को चिह्नित कर उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
जनसुरक्षा सुनिश्चित हो: ग्रामीणों, पशुओं और खासकर बच्चों की सुरक्षा के लिए इन क्षेत्रों की घेराबंदी या समतलीकरण प्राथमिकता के आधार पर हो।
क्षेत्र की जनता में उम्मीद
संजीव सरदार की इस पहल से पोटका और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में सुरक्षा को लेकर नई उम्मीद जगी है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इन गड्ढों के कारण आए दिन मवेशियों और कभी-कभी इंसानों की जान पर भी बन आती है। विधायक द्वारा विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने से अब शासन और प्रशासन स्तर पर हलचल तेज होने की संभावना है।

