
उदित वाणी, रांची : विधायकों और पूर्व विधायकों को आवास के लिए स्वावलंबन सहकारी समिति को कांके के रिंग रोड में उपलब्ध करायी गई 33 एकड़ जमीन के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. यह खुलासा और किसी ने नहीं बल्कि हेमंत सरकार के वित्त सह संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ही किया है. उन्होंने शुक्रवार को सदन में बताया कि उक्त जमीन बर्ष 1970-71 में ही भूमिहीनों के नाम पर बंदोबस्ती कर दी गई थी.
किशोर ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के दबाब में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में गरीबों की जमीन को गलत ढंग से सहकारी समिति को हस्तांतरित कर दिया था. उन्होंने इसपर भी सवाल उठाया कि बंदोबस्त हो चुकी जमीन कैसे विधायकों के लिए हस्तांतरित कर दी गई. किशोर ने बताया कि उन्होंने मामले में तीन दिनों के भीतर जमीन रजिस्ट्री के लिए पोर्टल खोलने का आश्वासन सदन में दिया था. लेकिन उन्होंने जमीन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए गुरुवार को राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री तथा इस विभाग के सचिव और रांची डीसी के साथ बैठक की. बैठक के दौरान यह बात भी सामने आई कि 33 एकड़ जमीन में से 3.30 एकड़ जमीन पर रिंग रोड बन गई है.
दो एकड़ जमीन में आदिवासी मसना है. तीन एकड़ जमीन पर डोभा बनाया गया है. तीन एकड़ जमीन में रिंग रोड बनने से गड्ढा हो गया है. वहीं 23.70 एकड़ जमीन पर ग्रामीण खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि दस्तावेज के अध्ययन से पता चला कि बर्ष 1970-71 में ही उक्त जमीन भूमिहीनों के लिए बंदोबस्त कर दी गई है. जिसपर वे आज भी खेती कर रहे हैं. वहीं उन्होंने कहा कि कोई भी जनप्रतिनिधि गरीबों की जमीन पर अपना आवास बनाना नहीं चाहेगा. गरीबों को कोई विस्थापित नहीं करना चाहेगा. उन्होंने विधायकों के लिए दूसरी जगह जमीन तलाशने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से एक समिति गठित करने का भी आग्रह किया.
बताया गया कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार समिति द्वारा 28 जून 2016 को राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव से जमीन आवंटन का अनुरोध किया गया था. इसके बाद कांके अंचल के मौजा चुटू स्थित थाना संख्या-164, खाता संख्या-118 और प्लाट संख्या-115 की 35 एकड़ गैरमजरुआ मालिक परती कदिम भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव तैयार किया गया था. सात अगस्त 2017 को भूमि हस्तांतरण को स्वीकृति प्रदान की गई. इसके बाद 10 अप्रैल 2018 को समिति ने एक करोड़ 70 लाख 62 हजार 500 रुपये जमा कर दिए और एक जून 2018 को हस्तांतरित भूमि का एकरारनामा भी पूरा कर लिया गया. पूरी प्रक्रिया लगभग एक बर्ष 11 माह और तीन दिनों में पूरी की गई.
भूमिहीनों दावा करते हुए जताया विरोध
बर्ष 1970-71 में भूमिहीन परिवार बंधना करमाली, जुड़वा करमाली, चरकू करमाली, ललकू मुंडा, राजू मिरदहा समेत अन्य के नाम से इस जमीन की बंदोबस्ती की गई है. आरोप है कि भाजपा सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के दबाब में इन आदिवासी परिवारों से बिना सहमति के उक्त बंदोबस्ती को रद्य कर दी गई. जब प्रशासनिक अधिकारी भूमि से कब्जा मुक्त कराने पहुंचे तो ग्रामीणों ने तीव्र विरोध किया. वर्तमान में भी जिन परिवारों की बंदोबस्ती रद्य कर दी गई थी, उनका कब्जा जमीन पर बना हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे हालात में यदि रजिस्ट्री के लिए पोर्टल खोल भी दिया जाता है तो भूमिहीनों की जमीन पर कब्जा करना सही नहीं होगा.
राधाकृष्ण किशोर और सीपी सिंह में हुई नोकझोंक
विधायकों की जमीन को लेकर संसदीय कार्यमंत्री द्वारा तत्कालीन भाजपा सरकार पर आरोप लगाने के बाद राधाकृष्ण किशोर और रांची के भाजपा विधायक सीपी सिंह के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई. किशोर के वक्तव्य के बाद सीपी सिंह ने उन्हें बड़े राजनीतिज्ञ कहकर संबोधित किया. इसपर किशोर ने कहा कि वे राजनीतिज्ञ नहीं है. इसपर सीपी सिंह ने कहा कि राजनीतिज्ञ नहीं होते तो पेट्रोल पर भी राजनीति नहीं करते. सीपी सिंह ने किशोर को कहा कि आप गरीबी हटाने के नाम पर गरीबों को हटानेवाली इंदिरा गांधी की पार्टी से ही हैं. इसके जबाब में संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी होतीं तो पेट्रोल की किल्लत की नौबत ही नहीं आती.

